हाथरस/हसायन। पिछले साल खून के आंसू रुलाने वाले गुलाब ने इस बार किसान के चेहरे पर मुस्कान बिखेर दी है। इस बार उत्पादन के लिए फूल की किल्लत है तो इसके रेट ने लंबी छलांग लगाई है। पिछले साल जो गुलाब आठ हजार रुपये मन (40 किग्रा) तक बिका था, उसकी शुरुआत ही इस बार 7,200 रुपये प्रति मन से हुई और अब यह फूल साढ़े 14 हजार रुपये के रिकॉर्ड भाव पर बिक रहा है। हालात यह हैं कि फूल के रेट में आए इस जबर्दस्त उछाल के चलते दूसरे शहरों से हसायन में आकर इत्र और गुलाब के अन्य उत्पादों का उत्पादन करने वाले ज्यादातर उद्यमियों को मैदान छोड़ने पर मजबूर कर दिया है। अब सिर्फ गिने-चुने व्यापारी ही कस्बे में अस्थायी फैक्ट्रियां लगाकर गुलाब उत्पादों का उत्पादन कर रहे हैं। गुलाब के दामों का असर इससे बनने वाली रुह के दामों पर भी पड़ा है। इसके रेट पिछले साल के मुकाबले दोगुने तक बढ़ गए हैं, जिससे अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इसकी मांग में भी गिरावट आई है।
पिछले साल किसान को हुआ था नुकसान
पिछले साल गुलाब की अच्छी-खासी पैदावार हुई थी। बाजार में माल की आवक भरपूर थी। लिहाजा इसके रेट की शुरुआत महज ढाई से तीन हजार रुपये प्रति मन से हुई, जोकि आखिर तक बढ़ते-बढ़ते बमुश्किल आठ हजार रुपये प्रति मन तक ही पहुंच सके। पूरे सीजन में किसान गुलाब की बाजिव कीमत पाने के लिए उद्यमियों से जूझते रहे, लेकिन पूरी फसल उन्हें जबर्दस्त चोट देकर गई।
40 फीसदी तक गिरी गुलाब की पैदावार
इस बार बारिश, आंधी और ओलावृष्टि की मार से गुलाब की फसल को काफी नुकसान पहुंचा। नतीजा, इसकी पैदावार में 30 से 40 फीसदी तक की कमी आई। इत्र, गुलाब जल, गुलकंद, रुह और अन्य गुलाब उत्पादों के कच्चे माल की शुरू से ही किल्लत रही। गुलाब के रेट इस बार 7,200 रुपये से खुले और अब इसकी कीमत 14 हजार रुपये प्रति मन के पार भी पहुंच गईं, जिससे दूसरे शहरों से गुलाब उत्पादों का उत्पादन करने आए उद्यमियों को तगड़ा झटका लगा है।
70 फीसदी उद्यमी छोड़ गए मैदान
पिछले साल हसायन में कन्नौज, कानपुर, वाराणसी, लखनऊ और अन्य शहरों के तकरीबन 100 से 125 छोटे-बड़े इत्र निर्माताओं ने गुलाब उत्पादों के लिए अस्थायी फैक्ट्रियां लगाई थीं, लेकिन इस बार गुलाब के ज्यादा रेट को देखते हुए 70 फीसदी उद्यमी बीच में ही मैदान छोड़कर जा चुके हैं। अब सिर्फ 40-45 अस्थायी फैक्ट्रियां ही चल रही हैं। इनका तर्क था कि इतना महंगा गुलाब खरीदकर बनने वाले माल को बाजार में खपाना आसान नहीं होगा।
15 लाख रुपये लीटर तक रूह के रेट
सबसे ज्यादा मांग गुलाब की रूह की रहती है। रूह का इस्तेमाल पान मसाला, सुपारी, इत्र और अन्य चीजें बनाने में किया जाता है। पिछले साल यह रूह अधिकतम 7-8 लाख रुपये प्रति लीटर बिकी थी, लेकिन इस बार इसके रेट 14-15 लाख रुपये प्रति लीटर पहुंच गए हैं, जिसेे भारतीय बाजार में खपाना आसान नहीं है। लिहाजा वही उद्यमी फिलहाल रूह का उत्पादन कर रहे हैं, जिनके पास अंतर्राष्ट्रीय बाजार के ऑर्डर रहते हैं।
50 फीसदी गिरा रूह का उत्पादन
रूह का उत्पादन पिछले साल के मुकाबले 50 फीसदी कम रह गया है। पिछले साल गुलाब के फूल की भरपूर उपलब्धता के चलते यहां बड़े पैमाने पर रूह का उत्पादन हुआ था। जगह भट्टियां लगाई थीं, लेकिन इस बार गिनी-चुनी भट्टियां ही दिख रही हैं।