इस दौरान दवाओं के स्टॉक, रिकॉर्ड और खरीद-बिक्री से संबंधित दस्तावेजों की गहन जांच की गई। बता दें कि कोडिस्टार एनएफ एक प्रतिबंधित दवा है, जो सूखी खांसी और एलर्जी के लक्षणों (जैसे बहती नाक, छींक आने) के इलाज के लिए इस्तेमाल होती थी, लेकिन नशे में प्रयोग और स्वास्थ्य पर इसके प्रतिकूल असर के कारण इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।
एसडीएम एवं ड्रग इंस्पेक्टर ने बताया कि मामले की गहन जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि अक्तूबर 2025 में राजस्थान में कोडीन युक्त कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत का मामला सामने आया था, जिसकी जांच अभी तक चल रही है। उत्तर प्रदेश विधान सभा में इसको लेकर समाजवादी पार्टी के लोगो ने हंगामा कर दिया था, जिसके बाद खुद मुख्यमंत्री ने जवाब दिया था।
दवा निकालकर फेंक दीं शीशियां
दवाओं के कारोबार से जुड़े कुछ लोगों ने बताया कि प्रतिबंधित दवा बेची नहीं जा सकती है, इसलिए कुछ लोग इन दवाओं को शीशियों से निकालने के बाद दूसरी सादा शीशियों में भर कर बेच रहे हैं। इसके बाद खाली शीशियां नष्ट करने के बजाय लापरवाही से कूड़े में फेंक दी गईं हैं, क्योंकि कोडिन युक्त प्रतिबंधित कफ सिरप का प्रयोग बड़ी मात्रा में नशे के विकल्प के रूप में हो रहा है, इसलिए इनकी मुंहमांगी कीमत मिलती है। मुनाफे के फेर में कई दवा विक्रेता इनकी चोरी-छिपे बिक्री कर रहे हैं।