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Hathras: सिकंदराराऊ में अस्पताल के कूड़े के ढेर में मिलीं प्रतिबंधित कफ सिरप की शीशियां, लखनऊ प्रयोगशाला भेजा

Fri, 16 Jan 2026 06:12 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस

सार

दवाओं के कारोबार से जुड़े कुछ लोगों ने बताया कि प्रतिबंधित दवा बेची नहीं जा सकती है, इसलिए कुछ लोग इन दवाओं को शीशियों से निकालने के बाद दूसरी सादा शीशियों में भर कर बेच रहे हैं।
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कूड़े के ढेर पर पड़ी खाली बोतलें - फोटो : संवाद
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विस्तार
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सिकंदराराऊ नगर के नयागंज और सब्जी बाजार के बीच स्थित पुराने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अहाते में कूड़े के ढेर पर प्रतिबंधित कोडिस्टार-एनएफ (कोडिन युक्त कफ सिरप) की 34 खुली शीशियां मिली हैं। सुबह 10 बजे इसकी सूचना मिलते ही पूरे प्रशासनिक तंत्र में खलबली मच गई। डीएम अतुल वत्स के निर्देश पर आनन-फानन इसकी जांच-पड़ताल शुरू कर दी गई।

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सिकंदराराऊ एसडीएम संजय कुमार, ड्रग इंस्पेक्टर राजकुमार, कोतवाली प्रभारी शिवकुमार शर्मा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और जांच-पड़ताल शुरू की। प्राथमिक जांच के अनुसार दवा निकाल कर शीशियां खाली कर कूड़े के ढेर में फेंक दी गईं थीं। ये कार्य किसी दवा विक्रेता द्वारा किया गया है, क्योंकि इस दवा पर प्रतिबंध और सख्ती बढ़ा दी गई है।

तीन खाली शीशियों को जांच के लिए लखनऊ प्रयोगशाला भेजा गया है और 31 को मौके पर नष्ट करा दिया गया। इन पर वर्ष 2029 की एक्सपायरी डेट दर्ज है। सुबह लोगों ने अस्पताल के परिसर में कूड़े के ढेर पर पड़ी हुईं इसकी खाली शीशियों को देखा तो यह बात चारों तरफ फैल गई। इसके बाद के नगर के छह बड़े मेडिकल स्टोरों पर सघन चेकिंग की गई। इसमें एक मेडिकल स्टोर पर फार्मासिस्ट नहीं मिला, इस पर नोटिस देकर जवाब मांगा गया है। जांच के दौरान सभी मेडिकल स्टोर संचालकों को कड़ी चेतावनी दी गई कि इस प्रतिबंधित कफ सिरप के बेचने या स्टॉक करने पर कड़ी कार्यवाही की जाएगी।

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इस दौरान दवाओं के स्टॉक, रिकॉर्ड और खरीद-बिक्री से संबंधित दस्तावेजों की गहन जांच की गई। बता दें कि कोडिस्टार एनएफ एक प्रतिबंधित दवा है, जो सूखी खांसी और एलर्जी के लक्षणों (जैसे बहती नाक, छींक आने) के इलाज के लिए इस्तेमाल होती थी, लेकिन नशे में प्रयोग और स्वास्थ्य पर इसके प्रतिकूल असर के कारण इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।

एसडीएम एवं ड्रग इंस्पेक्टर ने बताया कि मामले की गहन जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि अक्तूबर 2025 में राजस्थान में कोडीन युक्त कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत का मामला सामने आया था, जिसकी जांच अभी तक चल रही है। उत्तर प्रदेश विधान सभा में इसको लेकर समाजवादी पार्टी के लोगो ने हंगामा कर दिया था, जिसके बाद खुद मुख्यमंत्री ने जवाब दिया था।

दवा निकालकर फेंक दीं शीशियां
दवाओं के कारोबार से जुड़े कुछ लोगों ने बताया कि प्रतिबंधित दवा बेची नहीं जा सकती है, इसलिए कुछ लोग इन दवाओं को शीशियों से निकालने के बाद दूसरी सादा शीशियों में भर कर बेच रहे हैं। इसके बाद खाली शीशियां नष्ट करने के बजाय लापरवाही से कूड़े में फेंक दी गईं हैं, क्योंकि कोडिन युक्त प्रतिबंधित कफ सिरप का प्रयोग बड़ी मात्रा में नशे के विकल्प के रूप में हो रहा है, इसलिए इनकी मुंहमांगी कीमत मिलती है। मुनाफे के फेर में कई दवा विक्रेता इनकी चोरी-छिपे बिक्री कर रहे हैं।
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