शहर के पंजाबी मार्केट, बैनीगंज और बागला मार्ग जैसे इलाकों में दुकानदारों के बीच शोरूम को बाहर तक फैलाने की होड़ मच गई है। महंगे लहंगे, साड़ियां और सूट अब दुकान के कांच के पीछे नहीं, बल्कि फुटपाथ पर डमी लगाकर प्रदर्शित किए जा रहे हैं। एक दुकानदार को देखकर दूसरा भी अपने उत्पाद सड़क पर सज रहा है। इस ''डिस्प्ले'' की होड़ ने शहर के फुटपाथों का अस्तित्व ही मिटा दिया है।
सड़कें बनीं अवैध पार्किंग का अड्डा
जब फुटपाथ पर सामान सज जाता है, तो ग्राहकों के पास अपने दुपहिया और चौपहिया वाहन खड़े करने की जगह नहीं बचती। मजबूरन ग्राहक अपने वाहन मुख्य सड़क पर ही खड़े कर देते हैं। नतीजा यह होता है कि व्यस्त समय में सड़कें बेहद संकरी हो जाती हैं और पूरा यातायात रेंगने लगता है। एक चार पहिया वाहन आए जाए तो वह कई बाजारों को प्रभावित करता है। स्कूली बसें और आपात स्थिति में अस्पताल आनेजाने वाले वाहन घंटों फंसे रह जाते हैं।
हैरानी की बात यह है कि प्रशासन और नगर पालिका की नाक के नीचे यह अतिक्रमण फल-फूल रहा है। कई बार चेतावनी देने के बावजूद फुटपाथों से डिस्प्ले उत्पादों का सामान नहीं हटा है। व्यापारियों के रसूख और प्रशासन के ढुलमुल रवैये के कारण इसका असर शहर की लाइफलाइन मानी जाने वाली सड़कों पर साफ देखा जा सकता है।
बाजारों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव
शहर के प्रमुख बाजारों में न तो पार्किंग की व्यवस्था है और न ही सार्वजनिक शौचालय की। इससे जितना अधिक यहां आने वाले ग्राहक परेशान होते हैं, उतना ही दुकानदार। बाजार में दिन के बारह घंटे बैठने वाले दुकानदार वर्षों से इस समस्या से दो-चार हो रहे हैं। सबसे बुरा हाल पंजाबी मार्केट, बागला मार्ग, बैनीगंज, नजिहाई और कमला बाजार का है। पार्किंग न होने से दुकानदार अपने वाहन दुकानों के सामने खड़ा रखते हैं, जिससे फुटपाथ घिरने की शुरूआत हो जाती है।