अखिलेश वार्ष्णेय
हाथरस। किताबें झांकती हैं, बंद अलमारी के शीशों से..किसी शायर द्वारा कहीं गई यह लाइनें आज के दौर में सार्थक साबित हो रही हैं। लेकिन इंटरनेट के दौर में पुस्तकों का क्रेज लगातार कम हो रहा है। शहर के पुस्तकालय अब एक इतिहास बन गए हैं। एक समय में इंसान की सबसे अच्छी दोस्त कही जाने वाली किताबों की जगह अब इंटरनेट ने ले ली है। कॉलेज के पुस्तकालयों में भी अब सन्नाटा पसरा रहता है।
पुस्तकालय की कहानियां और किताबों से प्यार, ये गुजरे जमाने का किस्सा बन गया है। आलम यह है कि शहर के विभिन्न पुस्तकालयाें में किताबों के खजाने पर मकड़ियों और धूल ने कब्जा जमा लिया है। अपने पाठकों के लिए तरसती यह किताबें अपने हाल पर आंसू बहा रही हैं। पुरानी पीढ़ियां किताबों को अपना दोस्त समझती थी। बुजुर्गों की मानें तो पहले के लोग दिन के कई घंटे पुस्तकालय में गुजार देते थे। लेकिन आज की युवा पीढ़ी किताबों से बहुत दूर हो चुकी है। इस पीढ़ी के कई युवा ऐसे भी हैं, जिन्होेंने पुस्तकालय का दरवाजा तक नहीं देखा। यह पीढ़ी सोशल नेटवर्किंग साइटों को दोस्त ही नहीं, बल्कि अपनी जिंदगी समझने लगी है। इसका नतीजा है कि स्कूली बच्चे सिर्फ अपने सिलेबस तक की बुक्स ही पढ़ रहे हैं। साहित्य की दुनिया से बच्चे और अभिभावक दोनों ही दूर हो रहे हैं।
15 फीसदी छात्र ले रहे लाइब्रेरी का लाभ
हाथरस। जिले में पांच वित्तपोषित महाविद्यालय हैं। जहां पर बेहतरीन पुस्तकों का संग्रह उपलब्ध है। इन कॉलेजों में विद्यालयों की तुलना में कई गुना अधिक पुस्तकाें का संग्रह है, लेकिन कॉलेजों से छात्र-छात्राओं द्वारा सिर्फ 15 फीसदी पुस्तकों का इस्तेमाल किया जाता है। पीसी बागला महाविद्यालय की बात करें तो यहां के पुस्तकालय में लगभग 52 हजार पुस्तकाें का संग्रह है, लेकिन 15 फीसदी छात्र छात्राएं हीं किताबों के प्रति रुचि दिखाते हैं। शहर के अन्य कई पुस्तकालयों और वाचनालयों का भी यही हाल है। कुछ रिटायर्ड लोग ही इन पुस्तकालयों में नजर आते हैं। युवा वर्ग तो इन पुस्तकालयों के पास फटकता हुआ नजर नहीं आता।
किताबों की जगह मोबाइल-लैपटॉप
यह कहना गलत नहीं होगा कि कंप्यूटर के युग में मोबाइल और लैपटॉप ने युवाओं को पुस्तकों से दूर कर दिया है। जिस तरह से मोबाइल और लैपटॉप का प्रयोग बढ़ा है, उससे भी पुस्तकों के प्रति युवाओं का रुझान कम हुआ है। अब मोबाइल ही युवाओं का एक अच्छा दोस्त बन गया है।
-वैज्ञानिक क्रांति के इस युग में दिन-प्रतिदिन नए आविष्कार हो रहे हैं। इंटरनेट की सुविधा ने पूरे विश्व को एक सूत्र में जोड़ दिया है। एक क्लिक पर कहीं भी कुछ भी जानकारी मिल रही है। यही वजह है कि अब पुस्तकों के प्रति युवाओं में रुझान कम हो रहा है।
-डॉ. संदीप बंसल, प्रोफेसर, बागला कॉलेज
पुस्तकालयों से युवा पीढ़ी को जोड़ कर रखने के लिए वाचनालयों को परंपरागत के साथ ई लाइब्रेरी में तब्दील कर देना चाहिए। सोशल मीडिया के दौर में पुस्तकोें की अहमियत को बरकरार रखना ही होगा। पुस्तकों से महंगाई भी खत्म करनी होगी।
-डॉ. आरके शर्मा, पूर्व प्रभारी प्राचार्य
-भागदौड़ भरे जीवन में साहित्य पीछे छूट रहा है। भविष्य बनाने की दौड़ में युवा अपने साहित्य, इतिहास और धर्म से परिचित नहीं होना चाहता। इसके लिए जरूरी है कि बचपन से ही साहित्य के प्रति रूझान बढ़ाया जाए, जिससे कि पुस्तकोें के प्रति लगाव बना रहे।
-डॉ.अहिंसा नाइटिंगल, प्रधानाचार्य
-दुर्भाग्यवश आजकल पढ़ने की प्रवृ़ति लोगों में कम होती जा रही है। पुस्तकों से लोग दूर भाग रहे हैं। हर कुछ नेट पर ही खंगालना चाहते हैं। इसके चलते लोगों की जिज्ञासु प्रवृति और याद करने की क्षमता भी खत्म होती जा रही है।
-डॉ.दिलीप अमौरिया, प्रधानाचार्य
बागला कॉलेज में बनेगी ई-लाइब्रेरी
पीसी बागला कॉलेज में नए सत्र से ई लाइब्रेरी की शुरुआत होगी। कॉलेज के काफी पुराने पुस्तकालय को ऑनलाइन किया जाएगा। पुस्तकालय की करीब 52 हजार किताबें ऑनलाइन की जाएंगी। इसकी प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। साइंस की सभी किताबाें को ऑनलाइन कर दिया गया है। जुलाई से शुरू हो रहे नए शिक्षा सत्र में इस प्रक्रिया को पूरा कर लिया जाएगा। पूर्व प्रभारी प्राचार्य और पूर्व पुस्तकालय प्रभारी डॉ. आरके शर्मा ने बताया कि युवाओं में अब इंटरनेट के प्रति क्रेज बढ़ रहा है, इसलिए कॉलेज के पुस्तकालय को ऑनलाइन किए जाने की प्रक्रिया चल रही है।