देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई की मुख्य शाखा के करंसी चेस्ट से सीधे भारतीय रिजर्व बैंक को नकली नोटों की खेप भेजे जाने का खुलासा होने के बाद स्थानीय बैंकिंग सेक्टर में खलबली मच गई है। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस इस पूरे रैकेट की जड़ तक पहुंचने के लिए जांच में जुट गई है।
बैंक के करंसी चेस्ट और उससे जुड़ी शाखाओं के अधिकारियों व कर्मचारियों से पूछताछ की तैयारी कर रही है। दिसंबर 2022 में हाथरस स्थित एसबीआई की मुख्य शाखा के करंसी चेस्ट से भारी मात्रा में नकदी की एक खेप रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, कानपुर भेजी गई थी।
जब आरबीआई के निर्गम विभाग (दावा अनुभाग) ने इस नकदी की जांच की, तो उसमें बड़े पैमाने पर 100 के नकली नोट बरामद हुए। इस गंभीर चूक और अपराध को देखते हुए आरबीआई कानपुर के प्रबंधक प्रणीत पिंजर्ला की ओर से एफआईआर दर्ज करा दी गई है।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला सवाल बैंक की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर खड़ा हो रहा है। करंसी चेस्ट में नोट जमा होने और वहां से आगे भेजे जाने से पहले कई स्तर पर बेहद सख्त सुरक्षा और ऑटोमेटेड सॉर्टिंग मशीनों का इस्तेमाल किया जाता है। इतनी कड़ी निगरानी के बावजूद 100 के नकली नोटों की इतनी बड़ी खेप तिजोरी लांघकर सीधे आरबीआई के खजाने तक कैसे पहुंच गई?
पुलिस और जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस खेल में बैंक के ही कुछ अंदरूनी कर्मचारी या अधिकारी शामिल हो सकते हैं, जिन्होंने मिलीभगत कर असली नोटों की जगह जाली नोटों को चेस्ट में एड्जस्ट किया।
इसके अलावा इसके पीछे किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय जाली नोट सिंडिकेट के हाथ होने से भी इनकार नहीं किया जा रहा है। पुलिस अब दिसंबर 2022 के दौरान करंसी चेस्ट की जिम्मेदारी संभाल रहे स्टाफ, कैशियरों और नोटों की शार्टिंग करने वाले कर्मचारियों की सूची तैयार कर रही है। सीओ हिमांशु माथुर ने बताया कि प्रकरण में गहनता से जांच की जा रही है।