प्रदेश सरकार द्वारा पॉलिथीन पर प्रतिबंध लगाए जाने का शासनादेश जारी किए जाने के बाद भी नगर पालिका अधिकारी अब तक नहीं चेते हैं। ऐसा नहीं है पालिका अधिकारियों को शासनादेश न मिला हो। पॉलिथीन पर प्रतिबंध लगाए जाने के लिए 15 मई को शासनादेश प्राप्त हो गया।
नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी ने पॉलिथीन बंद कराए जाने के लिए अभियान चलाए जाने की प्रेस विज्ञप्ति भी जारी की थी। लगभग एक माह का समय बीत चुका है, लेकिन नगरपालिका अधिकारियों ने अभी तक पॉलिथीन पर प्रतिबंध लगाए जाने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किए। एक माह पूर्व ही केंद्र व प्रदेश सरकार के स्वच्छता अभियान के तहत पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। पॉलिथीन से ही सर्वाधिक गंदगी फैलती है। प्रदेश सरकार के निर्देशानुसार शहर में अभियान चलाया जाना था। पॉलिथीन का प्रयोग न करने के लिए शहर भर के बाजारों में माइक से मुनादी भी होनी थी।
मुनादी कराए जाने के बाद छापामारी कार्रवाई भी होनी थी। सबसे पहले पॉलिथीन के गोदाम, थोक विक्रेताओं के यहां छापेमार कार्रवाई करने के बाद छोटे दुकानदार और हथठेला वालों के यहां छापेमारी अभियान चलाया जाना था, लेकिन एक माह का समय बीतने के बाद भी अब तक अभियान नहीं चला है। बता दें कि पालिका अधिकारी भी खुद मानते हैं कि नाले-नालियों के चौक होने का कारण पॉलिथीन ही है। शहर के अधिकांश नाले पॉलिथीन से ही अटे पड़े हैं जिससे कई क्षेत्रों में जलभराव की समस्या बनी हुई है। पशु भी जब पॉलिथीन खा लेते हैं तो उनकी मौत हो जाती है।
नगर पालिका में और भी काम हैं, जिसके चलते व्यस्तता चल रही है। पॉलीथिन के प्रयोग पर रोक लगाने के लिए अभियान चलेगा। इस अभियान के लिए एक कमेटी भी बनाई जा रही है। कमेटी का गठन होते ही शहर में पॉलिथीन के खिलाफ छापेमारी अभियान शुरू कर दिया जाएगा।
लल्लन यादव, अधिशासी अधिकारी हाथरस