न्यायालय जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने देश के सात राज्यों से जुड़े 7.40 करोड़ रुपये के बहुचर्चित साइबर ठगी मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी मनीष गौतम और शौकीन की जमानत अर्जियों को खारिज कर दिया है।
हसायन के सत्यवीर सिंह का खाता शहर की बैंक ऑफ महाराष्ट्र में था। जगदंबा एंटरप्राइजेज के नाम से करंट खाता खोला गया था। इस खाते को म्यूल अकाउंट के रूप में प्रयोग किया जा रहा था। तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और तेलंगाना की सात अलग-अलग शिकायत के अनुसार कुल 7,40,61,233 रुपये की ठगी हुई थी, जिनमें से 80.88 लाख रुपये की रकम इसी खाते में आयी थी।
एनसीआरपी से मिले इनपुट के आधार पर साइबर सैल ने रिपोर्ट दर्ज की और 22 जुलाई को सत्यवीर सिंह के अलावा सिकंदराराऊ क्षेत्र के गांव पोरा निवासी मनीष गौतम, इसी गांव के अर्जुन सिंह व इटरनी गढ़ोला के आकाश कुमार को जेल भेजा था। शौकीन निवासी मुस्तफाबाद कॉलोनी, कोतवाली मंडी सहारनपुर को बाद में जेल भेजा गया। खाते में दर्ज पंजीकृत मोबाइल नंबरों में से एक नंबर मनीष गौतम का और दूसरा नंबर शौकीन का पाया गया। जेल जाने के बाद दोनों मनीष व शौकीन ने जमानत याचिका डाली थीं, जिस पर सोमवार को सुनवाई हुई। जिला शासकीय अधिवक्ता ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए दलील दी कि यह एक संगठित साइबर अपराध गिरोह है। यदि आरोपियों को जमानत पर रिहा किया गया तो वे साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकते हैं या पुन: अपराध को अंजाम दे सकते हैं। न्यायालय ने मामले को गंभीर मानते हुए दोनों की याचिका खारिज कर दी। प्रकरण में विवेचना अभी चल रही है और चार आरोपी अभी फरार हैं, जिन्हें पुलिस तलाश कर रही है।