जुलाई 2025 में आरोपी को जमानत मिल गई थी। जमानत का आधार यह बताया गया था कि दोनों पक्ष पड़ोसी हैं और सुलह की संभावना है। हालांकि, सत्र न्यायाधीश विनय कुमार तृतीय ने इस दलील को खारिज कर दिया।
बुजुर्ग के साथ हुई करीब 19 लाख रुपये की डिजिटल धोखाधड़ी के मामले में कोर्ट ने मुख्य आरोपी की जमानत रद्द कर दी है। कोर्ट ने आरोपी को तत्काल आत्मसमर्पण करने के आदेश दिए हैं।
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मामला हसायन थाना क्षेत्र के ग्राम नगला बरी पट्टी देवरी का है। रामकिशन (76) का मोबाइल करीब एक साल पहले उनके घर से चोरी हो गया था। जांच में सामने आया कि आरोपी आरेंद्र ने उनका मोबाइल चुराकर और उनके आधार कार्ड का गलत इस्तेमाल कर फर्जी यूपीआई आईडी बनाई। इसके बाद आरोपी ने 53 ट्रांजेक्शन के जरिये उनके खाते से लगभग 19 लाख रुपये साफ कर दिए।
पुलिस की विवेचना के दौरान पता चला कि आरोपी ने धोखाधड़ी की इस रकम का उपयोग व्यक्तिगत विलासिता के लिए किया। गिरफ्तारी के समय आरोपी के कब्जे से भारी मात्रा में सामान बरामद हुआ था। पुलिस ने चार हजार रुपये के अलावा जेवरात बरामद किए थे। साथ ही उसने कबूला था कि आठ लाख रुपये की जमीन इन्हीं रुपये से खरीदी थी।
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जुलाई 2025 में आरोपी को जमानत मिल गई थी। जमानत का आधार यह बताया गया था कि दोनों पक्ष पड़ोसी हैं और सुलह की संभावना है। हालांकि, सत्र न्यायाधीश विनय कुमार तृतीय ने इस दलील को खारिज कर दिया। कोर्ट ने पाया कि आरोपी के खिलाफ अपराध अत्यंत गंभीर प्रकृति का है, जिसमें आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। लिहाजा कोर्ट ने अभियुक्त आरेंद्र को आदेश दिया है कि वह सक्षम न्यायालय के समक्ष तत्काल आत्मसमर्पण करे।