जतिन बताते हैं कि पढ़ाई करने के बाद उन्हें कभी नौकरी करने की इच्छा नहीं थी। वह अपना काम करना चाहते थे। मत्स्य विभाग से उन्हें मछली के आहार के व्यापार के बारे में जानकारी मिली। तब उन्होंने काम शुरू किया। उत्पाद बेचने में किसी भी प्रकार की समस्या नहीं है। उत्पादों का भाव बाजार भाव से कम रखते हैं। इसलिए स्थानीय किसान ही खरीदार हैं। विभाग भी उनकी सहायता करता है।
मछली, पशु आहार के व्यवसाय के साथ गुलाब की खेती कर मैं हर साल करीब 15 लाख रुपये कमा लेता हूं। नौकरी में यह संभव नहीं है। -जतिन कुमार, युवा किसान।
मत्स्य विभाग की लघु आहार मील योजना 30 लाख रुपये की है। जिसमें 40 प्रतिशत अनुदान विभाग देता है। लाभार्थी को पहले पूरा खर्च खुद ही करना होता है। इसके बाद अनुदान डीबीटी के माध्यम से लाभार्थी के खाते में स्थानांतरित किया जाता है। वहीं अनुसूचित जाति व महिलाओं के लिए इसमें 60 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है।-मोहम्मद आरिफ, मत्स्य निरीक्षक।