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Hathras News: बी-12 की कमी...जोड़ों में दर्द, कमजोरी और थकान

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प्रतीकात्मक चित्र। - फोटो : Archive
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अगर आपकी उम्र 40 के पार है और आप बिना वजह हर समय थकान, कमजोरी या जोड़ों के दर्द से परेशान हैं, तो इसे बढ़ती उम्र का तकाजा समझकर नजरअंदाज न करें। यह शरीर में विटामिन बी-12 की भारी कमी का संकेत है। जिला अस्पताल के हालिया आंकड़े इस बात की तस्दीक कर रहे हैं कि अधेड़ उम्र की एक बड़ी आबादी इस समय इस बीमारी की गिरफ्त में है।
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एक महीने में आए 650 से अधिक मामले

जिला अस्पताल की ओपीडी से मिले आंकड़े चौंकाने वाले हैं। बीते एक महीने के भीतर अस्पताल में विटामिन बी-12 की कमी के 650 से अधिक नए मामले दर्ज किए गए हैं। फिजिशियन डाॅ. वरुण चौधरी के मुताबिक अस्पताल आने वाले हर पांचवें मरीज में थकान और बदन दर्द की शिकायत मिल रही है। लक्षण के आधार पर इन मरीजों की जांच कराई जाती है, जिसमें हर दूसरे व्यक्ति में बी-12 की कमी पाई जा रही है। एक माह में करीब 1200 जांच हुई हैं।






40 से 50 वर्ष के लोग सबसे ज्यादा प्रभावित

आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि इस कमी का शिकार सबसे ज्यादा 40 से 50 साल की उम्र के लोग हो रहे हैं। कुल मरीजों में इनकी संख्या 58 फीसदी के करीब है। इनमें भी महिलाओं की संख्या अधिक है। खान-पान में लापरवाही से इस उम्र में शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा होने लगता है। मरीजों ने शिकायत की है कि उन्हें सुबह उठते ही थकान महसूस होती है, हाथ-पैरों में झनझनाहट होती है और जोड़ों का दर्द रोजमर्रा के कामों में रुकावट बन रहा है।
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एसिडिटी है एक बड़ी वजह

फिजीशियन डाॅ. वरुण ने बताया कि विटामिन बी-12 की कमी की मुख्य वजह एसिडिटी है। कई बार हम डाइट तो पूरी लेते हैं, लेकिन हमारा पेट उसे सोख नहीं पाता। पेट में बनने वाला इंट्रिन्सिक फैक्टर नाम का प्रोटीन बी-12 को सोखने में मदद करता है। अगर पेट में संक्रमण या गैस्ट्राइटिस हो, तो यह प्रोटीन नहीं बनता। गैस या एसिडिटी की दवाएं और डायबिटीज की कुछ दवाएं पेट में एसिड कम करती हैं। लगातार सेवन से शरीर भोजन से बी-12 अलग नहीं कर पाता। चिकित्सक ने बताया कि उम्र बढ़़ने के साथ पेट में नेचुरल एसिड बनना कम हो जाता है। इससे भी समस्या उत्पन्न होती है।






बचाव के उपाय : खाने में शामिल करें दुग्ध उत्पाद
डाॅ. वरुण ने बताया कि विटामिन बी-12 प्राकृतिक रूप से पशु उत्पादों में पाया जाता है। शाकाहारी लोगों में इसकी कमी का जोखिम सबसे ज्यादा होता है, क्योंकि पेड़-पौधों से मिलने वाले भोजन में यह नहीं होता। इसलिए अपने प्रतिदिन के खाने में दूध, दही, पनीर और छाछ को हिस्सा बनाना चाहिए। बिना चिकित्सक की सलाह के लगातार गैस की गोलियां खाने से भी बचें।








बी-12 की कमी के लक्षण

-मेगालोब्लास्टिक एनीमिया : इसमें शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं सामान्य से बहुत बड़े आकार की बनने लगती हैं और पूरी तरह विकसित नहीं हो पातीं। इसके कारण शरीर के अंगों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंचती, जिससे हर वक्त थकान, कमजोरी, सांस फूलना और त्वचा में पीलापन दिखने लगता है।



-पेरीफेरल न्यूरोपैथी : बी-12 नसों के ऊपर की सुरक्षा परत बनाए रखता है। इसकी कमी से हाथों और पैरों में सुन्नता, झुनझुनी (सुइयां चुभना जैसा एहसास) और कमजोरी होने लगती है।

-कमजोर यादाश्त : बी-12 की कमी से दिमाग की कार्यप्रणाली प्रभावित होने से भूलने की बीमारी, भ्रम और बहुत ज्यादा चिड़चिड़ापन या डिप्रेशन हो सकता है।



-ग्लोसाइटिस : जीभ का एकदम लाल हो जाना, उसमें सूजन आ जाना, कट लगना या बार-बार मुंह में छाले होना, इसका एक शुरुआती संकेत है।





पैथॉलोजी में बी-12 सहित अन्य विटामिन की जांच की सुविधा उपलब्ध है। 40 की उम्र पार करते ही लोगों की इसकी कमी देखी जा रही है। उन्हें खान-पान में सुधार की सलाह दी जाती है। अत्यधिक कमी की स्थिति में संबंधित दवाएं शुरू की जाती है। बेहतर है लोग अपने खाने में सुधार करें। गैस होने की स्थिति में चिकित्सक की सलाह से ही दवा लें।
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डाॅ. सूर्यप्रकाश, सीएमएस जिला अस्पताल।
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