सर्दी में हार्ट अटैक व स्ट्रोक की खतरा बढ़ गया है। केवल एलोपैथी ही नहीं, बल्कि आयुर्वेदिक दवाओं के सहारे भी इन खतरनाक बीमारियों से बचाव किया जा सकता है। कम संख्या में सही, लेकिन जिला अस्पताल में राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय पर लोग उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।
इनमें सर्दी खांसी से लेकर हृदय रोग व बीपी के मरीज भी शामिल हैं। सोमवार को यहां 52 मरीजों को देखा गया, जिनमें 14 मरीज बीमारियों से जुड़े रहे। चिकित्सक डाॅ. सुनील कुमार ने बताया कि आयुर्वेद पद्धति से हृदय की गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है। आयुर्वेदिक दवाएं रक्त प्रवाह को सही करती हैं, जिससे हार्ट अटैक व स्ट्रोक का खतरा कम होता है। अर्जुन की छाल, सर्पगंधा, अश्वगंधा व ब्राह्मी, लहुसन व गुग्गल, त्रिफला आदि जड़ी बूटियों से बनी दवाएं इन बीमारियों में कारगर हैं। चिकित्सक की सलाह से नियमित दवाएं व सही खानपान से ठीक हुआ जा सकता है। कई मरीज इसका लाभ भी उठा रहे हैं।
खानपान पर नियंत्रण जरूरी
आयुर्वेदिक दवाओं के साथ हृदय रोग व स्ट्रोक से बचने के लिए खानपान पर नियंत्रण भी जरूरी है। इसके लिए आयुर्वेद में हेमंत ऋतुचर्या के बारे में बताया गया है। इसमें नमक के कम प्रयोग, सर्दियों में विशेष फल व योगासन के बारे में जानकारी दी गई है। डाॅ. सुनील कुमार ने बताया कि आयुर्वेद केंद्रों पर मरीजों को इनकी भी जानकारी दी जा रही है।
जिला अस्पताल में पहुंचे 186 बीपी के मरीज
सोमवार के चलते जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या अधिक रही। यहां 1893 मरीजों के पर्चे बनाए गए। यहां बीपी के 186 मरीज पहुंचे। इनके अलावा सांस के 276 मरीज रहे। छाती संक्रमण व सर्दी जुकाम के 232 मरीज रहे।
ठंड में कमर व जोड़ों में दर्द बढ़ गया है। इसके लिए हड्डी रोग विशेषज्ञ को दिखाया है। बीपी की समस्या के निदान के लिए आयुर्वेद चिकित्सा केंद्र से उपचार करा रहा हूं। इससे काफी लाभ मिला है।
-रामजीलाल निवासी महमूदपुर बरसै
काफी समय से ब्लड प्रेशर की समस्या है। आयुर्वेद चिकित्सालय से दवा ली है। इससे लाभ हुआ है। आगे भी आयुर्वेदिक दवाओं का सेवन करती
प्रेमवती निवासी खोंड़ा हजारी