दंडौती परिक्रमा से भक्ति में डूबीं सड़कें
दुर्गाष्टमी पर दंडौती परिक्रमा देने की परंपरा भी पूरी श्रद्धा और उत्साह से निभाई गई। किला गेट स्थित प्राचीन पथवारी देवी मंदिर से भक्तों ने दंडौती परिक्रमा शुरू की और मुरसान गेट स्थित बौहरे वाली देवी मंदिर पहुंचकर विश्राम किया। जगह-जगह विभिन्न संगठनों ने शिविर लगाकर परिक्रमार्थियों की सेवा-सुश्रुसा की।
आधी रात तक निकलीं झंकियां और डोले
शहर के विभिन्न देवी मंदिरों और मोहल्लों से माता रानी की नयनाभिराम झांकियां और डोले गाजे-बाजे के साथ निकाले गए। श्रद्धालु भक्ति गीतों पर झूमते-नाचते नजर आए। पथवारी मंदिर, चामुंडा मंदिर, चामड़ गेट स्थित चामुंडा मंदिर और बौहरे वाली देवी मंदिरों से निकली शोभायात्राओं का जगह-जगह पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया।
प्रमुख मंदिरों पर रहा मेले जैसा नजारा
सासनी स्थित मां कंकाली मंदिर, सहपऊ के भद्रकाली, बिसाना के तारागढ़ वाली, मुरसान के पीपल वाली देवी, शहर के चामुंडा, पथवारी और बौहरे वाली देवी मंदिर पर दिनभर भारी भीड़ उमड़ी। मंदिरों के बाहर सजीं प्रसाद, चुनरी और खिलौनों की दुकानों पर मेले सरीखा नजारा दिखा।