पिता देवेंद्र सिंह का कहना है कि पूर्व में भी दर्ज हुए मुकदमे पुलिस की मिलीभगत से हुए और उनके परिवार को परेशान किया गया। चार जुलाई 2025 में बेटे पर जानलेवा हमले की रिपोर्ट दर्ज की गई, जिसमें उन्हें भी नामजद किया गया, जबकि वे जम्मू में थे। इससे पहले भी 23 फरवरी 2024 को दर्ज हुए जानलेवा हमले व छह मई 2023 को दर्ज हुए मारपीट के मुकदमे भी गलत तरीके से लिखाए गए थे। इन्हीं मुकदमों की पैरवी में अखिलेश उलझा रहा और उसकी हत्या कर दी गई।
हत्यारोपी विक्रम उर्फ विक्की गैंगस्टर है। उस पर कई मुकदमे हैं। इसके साथ ही केके पंडित पर भी कई मुकदमे बताए जा रहे हैं। हत्याकांड के बाद जब से मुकदमा दर्ज हुआ है, तब से पुलिस हत्यारोपियों का आपराधिक इतिहास छिपाती आई है। यही वजह है कि परिजन लगातार पुलिस पर आरोप लगाते आ रहे हैं।
आरोप गलत हैं। पीआरवी का समय निर्धारित है। निगरानी में हुई लापरवाही के चलते ही पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई की गई थी। शेष आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही हैं। उन्हें जल्द पकड़ लिया जाएगा।-चिरंजीवनाथ सिन्हा, एसपी
सर्विलांस व इंटेलिजेंस फेलियर
पुरानी रंजिश के मामलों व शातिर अपराधियों की गतिविधियों पर हर समय नजर रखी जाती है। बीट सिपाही से लेकर थाना प्रभारी की जिम्मेदारी होती है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के छह माह पहले से संवेदनशील व अतिसंवेदनशील गांव चिह्नित किए जाते हैं, लेकिन इस सबके बाद भी दिनदहाड़े हत्या और हत्यारोपियों का प्रदेश छोड़ देना सीधे-सीधे इंटेलीजेंस और फिर सर्विलांस फेलियर है। इसी लापरवाही पर सादाबाद एसओ, एक दारोगा व सिपाही को हटाया जा चुका है।
पुलिस पर सीधे-सीधे आरोप
मृतक की बहन डॉली ने सादाबाद पुलिस पर सीधे-सीधे आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि मुन्नी देवी कोल्ड के सामने पीआरवी खड़ी रहती है, लेकिन घटना के समय जानबूझ कर पीआरवी को राया रोड पर भेजा गया था। उनका आरोप है कि घटना की पुलिस को पहले से जानकारी दी। उनका कहना है कि दो-दो करके आरोपी सरेंडर हो रहे हैं।