नए नियमों के चलते जिले में सिर्फ सिकंदराराऊ तहसील के लाइससेंधारकों को कारतूस खरीद करने की अनुमति जारी की जा रही है। बाकी हाथरस, सादाबाद व सासनी तहसील में अनुमति के लिए लाइसेंसधारकों को प्रार्थना पत्र लेकर भटकना पड़ रहा है, लेकिन उन्हें अनुमति नहीं दी जा रही।
38 से घटकर 15 रह गई शस्त्र विक्रेताओं की संख्या
शस्त्र विक्रेताओं को इस समय काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लाइसेंस जारी न होने से शस्त्रों की बिक्री नहीं हो रही। अनुमति के नियम जटिल होने से कारतूस की बिक्री भी ठप हो गई है। जिले के कुल 38 में से मात्र 15 शस्त्र विक्रेताओं ने ही अपने लाइसेंस का नवीनीकरण कराया है। आमदनी न होने से सिर्फ आठ ही सक्रिय रूप से दुकान चला रहे हैं। माना जा रहा है कि अगर यही हाल रहा तो इनकी संख्या में और कमी हो जाएगी।
जिले में शस्त्र लाइसेंस व कारतूस की बिक्री न होने से राजस्व की भी हानि हो रही है, क्योंकि शस्त्र पर 28 फीसदी और कारतूस पर 18 फीसदी की दर से कर लगाए जाने का प्रावधान है, लेकिन बिक्री न होने से राजस्व का भी नुकसान हो रहा है। वर्ष 2022 से पहले जिले में हर साल करीब छह लाख कारतूस की मांग रहती थी। यहां अहम है कि एक शस्त्र धारक को एक बार में अधिकतम 100 व एक साल में अधिकतम 200 कारतूस तक की खरीद करने का अधिकार है।
सबसे पहली बात तो यह है कि कोई भी नियम पूरे प्रदेश में एक समान होना चाहिए। हाथरस व कुछ एक जिलों के लिए अलग से आदेश जारी करना सही नहीं है। पारदर्शिता के लिए एक पोर्टल तैयार करना चाहिए, जिसमेें खरीद-फरोख्त का ब्योरा अपडेट होना चाहिए।-उद्धवकृष्ण शर्मा, शस्त्र विक्रेता।
सरकारी महकमे के अड़ंगे की वजह से दिक्कत हो रही है। नए नियम में जब स्वीकृति देनी है तो देनी चाहिए। व्यापार पूरी तरह खराब हो चुका है। शस्त्र बिक नहीं रहे। कारतूस की स्वीकृति नहीं मिल रही तो हम दुकानदार क्या करें।-संजीव पाराशर, शस्त्र विक्रेता, सादाबाद।
कई साल से कारतूस खरीद के लिए हाथरस में प्रयास कर रहा हूं, लेकिन कोई स्वीकृति देने के लिए तैयार नहीं। नए नियम की किसी को जानकारी नहीं है, इसलिए अब परेशान होना पड़ता है।-अनिल वर्मा, शस्त्र लाइसेंसधारक, हाथरस।
कारतूस खरीदना हाथरस में तो मुश्किल है। दूसरे जिलों में आधार कार्ड व लाइसेंस दिखाकर ही कारतूस दे दिए जाते हैं तो फिर शस्त्रधारक कारतूस खरीदने के लिए यहां क्यों परेशान होगा। कोई आसान रास्ता होना चाहिए।-भिक्खी चौधरी, शस्त्र लाइसेंस धारक, मुरसान।
शासन से वर्ष 2022 में पत्र जारी हुआ था, जिसमें अनुमति के आधार पर कारतूसों की बिक्री के आदेश जारी हुए थे। अगर किसी तहसील में अनुमति के प्रार्थना पत्र लंबित हैं तो उन्हें दिखवाकर निस्तारित कराया जाएगा।-राहुल पांडेय, डीएम, हाथरस।