जिलाधिकारी को ज्ञापन देते व्यापारी।
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संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के पदाधिकारियों ने सोमवार को विभिन्न मांगों को लेकर वित्त मंत्री के नाम डीएम को ज्ञापन सौंपा। बैंकिंग में होने वाली समस्याओं के समाधान की मांग की।
व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने सौंपे ज्ञापन में कहा कि व्यापारियों को पचास लाख तक वर्किंग कैपिटल कर्ज बिना जमानत आठ प्रतिशत ब्याज दर पर देने की व्यवस्था की जाए। मुद्रा लोन योजना केवल नए कारोबार के लिए है। जिससे पुराने दुकानदारों को कोई लाभ नहीं है। देश के भिन्न भिन्न बैंक अपने ग्राहकों को भिन्न प्रकार के खर्चे वसूल रहे हैं। आजादी के बाद से 2015 तक कभी बैंकों द्वारा ग्राहकों से खर्च नहीं लिया गया। जबकि इस सरकार में विभिन्न प्रकार बैंकों द्वारा खर्चों को ग्राहकों पर थोपा जा रहा है। जो अनुचित है, जिसे तत्काल वापस लिया जाए। फर्म का चालू खाता खोलते समय जीएसटी रजिस्ट्रेशन बैंकों द्वारा मांगा जाता है। भारत में 80 प्रतिशत व्यापारियों का जीएसटी रजिस्ट्रेशन नहीं है। जीएसटी रजिस्ट्रेशन की बाध्यता को समाप्त करने का आदेश जारी करने की कृपा करें। बैंकों में रेजगारी एवं छोटे नोट न लेते हैं न देते हैं। इस कारण बहुत सी कठिनाइयां आ रही हैं। रेजगारी व छोटे नोट की आपूर्ति सभी बैंकों में की जाए। एक करोड़ से ऊपर का कैश ट्रांजेक्शन चार्ज अविलंब समाप्त किया जाए। कभी कभी व्यापार में बहुत सी कठिनाइयां आती रहती हैं। अत: बैंकों द्वारा तीन माह में एनपीए करने की अवधि को बढ़ाकर 12 माह किया जाए। ज्ञापन देने वालों में मदन मोहन अपनावाले, अनुभव अग्रवाल, हरीशंकर वार्ष्णेय, मोहन लाल अग्रवाल, महेश चंद्र वर्मा, अरुण माहेश्वरी, गौरव वर्मा, निरंजन लाल सिंघल, प्रहलाद वार्ष्णेय, कन्हैया लाल आदि थे।