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Hathras News: अमृत सरोवर बन गए नरक, बूंद-बूंद को तरसे बेजुबान

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सहपऊ ब्लॉक के ग्राम पंचायत खोंड़ा का अमृत सरोवर। संवाद - फोटो : Samvad
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जल संरक्षण और ग्रामीण विकास के बड़े-बड़े दावों के साथ लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए जिले के 120 अमृत सरोवर सूखे हैं। आम आदमी तो दूर की बात यहां पशु-पक्षियों के पीने लायक पानी तक नहीं है। अधिकांश सरोवर में कीचड़ और बेहद गंदा पानी है। गांवों का गंदा पानी इनमें पहुंच रहा है। इन सरोवरों को मनरेगा व अन्य निधियों से बनाया गया था। विभागीय दावों के अनुसार जिले में 85 तालाबों को सिंचाई विभाग की नहरों के जरिए भरा जा रहा है, शेष तालाबों को निजी स्रोतों से भरने का प्रयास किया जा रहा है।
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कजरौठी में सरोवर बना गंदा नाला
विकास खंड सादाबाद के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत कजरौठी का हाल सबसे बुरा है। यहां बने अमृत सरोवर में ताजे और साफ पानी की व्यवस्था करने के बजाय, गांव के घरों से निकलने वाला गंदा पानी नालियों के रास्ते सीधे सरोवर में गिराया जा रहा है। वर्तमान में सरोवर में दूषित पानी जमा हो रहा है, जो बीमारियों को दावत दे रहा है।

शाहपुर कला और हाजीपुर में भी सूखा
गांव शाहपुर कला में बना अमृत सरोवर बेहाल है। इसका निर्माण पशु-पक्षियों व जानवरों को पानी उपलब्ध कराने के लिए हुआ था, अब यह सूखा है। गांव हाजीपुर में भी स्थिति जस की तस है। भीषण गर्मी में सरोवर सूखा होने के कारण निराश्रित गोवंश और पक्षियों को पीने का पानी तक नसीब नहीं हो रहा है।
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मनरेगा से कार्य, फिर भी बदहाल
ग्राम पंचायत गुतहरा के अमृत सरोवर में एक बूंद पानी नहीं है। चिलचिलाती धूप में वन्य जीव और आवारा पशु पानी की तलाश में भटक रहे हैं। यह हाल तब हैं, जब इन सरोवर में समय-समय पर मनरेगा से खोदाई आदि कार्य कराए जाते रहते हैं।

ग्रामीण बोले.. भूल गया प्रशासन
रामगोपाल निवासी कजरौठी का कहना है कि प्रशासन ने लाखों रुपये लगाकर सरोवरों का निर्माण तो करा दिया, लेकिन रखरखाव की जिम्मेदारी भूल गया। इस लापरवाही का खामियाजा बेजुबान भुगत रहे हैं। जयपाल सिंह का कहना है कि अगर प्रशासन सरोवर की सफाई कराकर इसमें साफ पानी भरने की उचित व्यवस्था कर दे, तो बेजुबान वन्य जीवों और पशुओं के लिए यह जीवनदायी साबित होगा।
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सिंचाई विभाग की ओर से जिले के 85 तालाबों में पानी भरा जा रहा है। इसके अलावा अन्य तालाबों को निजी स्रोत से भरने की कवायद की जा रही है।
पीएन दीक्षित, सीडीओ।
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