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Hathras: गंगा-जमुनी तहजीब का गवाह बना अखिल भारतीय कवि सम्मेलन, देशभर के कवि-शायरों ने बिखेरा काव्य रस

Mon, 06 Apr 2026 04:45 PM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस

सार

अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरा में निखत अमरोही, मध्यम सक्सेना, जिया नामा, फैज कुमार, राशीद राहत, नवीन नीर, अमित शुक्ला, जुनैद अख्तर और नितिन मिश्रा सहित कई रचनाकारों ने अपनी-अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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कवि सम्मेलन में अतिथियों का सम्मान करते आयोजक - फोटो : आयोजक
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विस्तार
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हाथरस शहर में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरा गंगा-जमुनी तहज़ीब, सांप्रदायिक सौहार्द और आपसी भाईचारे का सशक्त संदेश देने वाला यादगार आयोजन साबित हुआ। 

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अलीगढ़ रोड स्थित अंबा होटल में आयोजित इस कार्यक्रम ने न केवल साहित्य प्रेमियों को भाव-विभोर किया, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समरसता की भी अनूठी मिसाल पेश की। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ शायर एवं कवि विनीत आशना ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में एसडीएम सदर राजबहादुर सिंह उपस्थित रहे। ब्रज कला केंद्र के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का संयोजन चंद्रगुप्त विक्रमादित्य ने किया।

निखत अमरोही, मध्यम सक्सेना, जिया नामा, फैज कुमार, राशीद राहत, नवीन नीर, अमित शुक्ला, जुनैद अख्तर और नितिन मिश्रा सहित कई रचनाकारों ने अपनी-अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में प्रस्तुत शेरों और कविताओं को दर्शकों ने पूरे मनोयोग और उत्साह के साथ सुना और सराहा। विशिष्ट अतिथि एसडीएम सदर राजबहादुर सिंह ने साहित्य की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए ऐसे आयोजनों को समाज में सकारात्मक ऊर्जा और एकता का माध्यम बताया।

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अध्यक्ष विनीत आशना ने भी साहित्य के जरिए समाज को जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। हाथरस की धरती को साहित्य और संस्कृति की समृद्ध भूमि बताते हुए उपस्थित लोगों ने इस आयोजन की मुक्त कंठ से सराहना की।

इन कवियों ने पेश की शायरी
  • निखत अमरोही ने पढ़ा अपनी गुमनाम कहानी नहीं होने दूंगी, खुद को मैं दूसरी रानी नहीं होने दूंगी।
  • मध्यम सक्सेना ने कहा दिन बनाने में रात लगती है, तुमको यह बात आसान लगती है।
  • जिया नामा ने भाव व्यक्त किए उसे लगता है हम मुश्किलों को झेल लेंगे, खुदा हम जैसों पर कितना भरोसा कर रहा है।
  • फैज कुमार ने पढ़ा पहले तो प्यार करने के काबिल बना दिया, फिर पत्थर सा दिल क्यों बना दिया।
  • राशीद राहत ने कहा यूं तो कितने सारे लोग हैं दुनिया में, कुछ लोगों से मिलता हूं तो लगता है कितने प्यारे लोग हैं दुनिया में।
  • नवीन नीर ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा जिन्हें तमीज नहीं धूप खर्च करने की, सुना है जेब में वह आफ़ताब रखते हैं।
  • अमित शुक्ला ने कहा प्यास क्या उसको तो पानी चाहिए, शर्म तो दरिया को आनी चाहिए।
  • जुनैद अख्तर ने पढ़ा कातिल गवाह बनकर अदालत में आ गए, मुझ पर मेरे कत्ल का इल्जाम लगा गए।
  • नितिन मिश्रा ने भक्ति रस में कहा लिखो श्रीराम दिल में है अगर भव पार की चाह, लिखे श्रीराम के पत्थर भी जल में तैर जाते हैं।
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