अलंकार अग्निहोत्री ने मांग की है कि एससी-एसटी एक्ट में पहले गिरफ्तारी के प्रावधान को हटाकर पहले जांच, फिर एफआईआर और उसके बाद गिरफ्तारी की व्यवस्था लागू की जाए।
यूजीसी के नए नियमों का विरोध करने पर चर्चा में आए बरेली के पूर्व नगर मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री 29 जनवरी को हाथरस पहुंचे। उन्होंने देश की सभी जातियों को एकजुट करने के उद्देश्य से वर्तमान एससी-एसटी एक्ट को खत्म करने की मांग करते हुए आंदोलन का बिगुल फूंका।
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राष्ट्रीय सवर्ण परिषद के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने यूजीसी के नियम पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने का स्वागत किया। उन्होंने देश के सांसदों को कॉरपोरेट का कर्मचारी करार देते हुए कहा कि 13 जनवरी को नियम लागू होने के बाद 29 जनवरी तक किसी भी सांसद की ओर से कोई ठोस बयान सामने नहीं आया है, जो उनकी निष्क्रियता को दर्शाता है।
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उन्होंने मांग की कि एससी-एसटी एक्ट में गिरफ्तारी से पहले जांच की व्यवस्था तक नहीं है, जबकि पहले जांच, फिर एफआईआर और उसके बाद गिरफ्तारी की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए, लेकिन इस एक्ट में बिना किसी जांच के सिर्फ तहरीर के आधार पर ही गिरफ्तारी का नियम बहुत ही गलत है।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने निर्णय का भी उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने उस फैसले को पलट दिया, जो काशीनाथ महाजन केस में दिया गया था। उन्होंने एक फरवरी को प्रस्तावित भारत बंद और सात फरवरी को आयोजित की जाने वाली सद्भावना यात्रा में सभी वर्गों और जातियों के लोगों से भागीदारी की अपील की। कार्यक्रम में सवर्ण परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज धवरैया, जिलाध्यक्ष आदित्य ठाकुर सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।