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अजित ने सादाबाद में की थीं 100 से अधिक सभाएं

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अशोक वार्ष्णेय, सादाबाद।
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राष्ट्रीय लोकदल के मुखिया और पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी अजित सिंह अब हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन सादाबाद से उनका वास्ता करीब 35 वर्ष पुराना रहा है। क्यों कि उनके पिता पूर्व पीएम चौधरी चरण सिंह के देहांत से पहले ही वह सक्रिय राजनीति में आ चुके थे और 29 मई 1987 को जब चौधरी चरण सिंह का स्वर्गवास हो गया।
तब पार्टी की कमान उनके हाथों में आ गई। 1989 में हुए विधानसभा के चुनाव में चौधरी अजित सिंह ने सादाबाद के तत्कालीन विधायक कुंवर छावी मियां को सादाबाद से प्रत्याशी बनाया और उन्हें जीत दिलाई। तब से लेकर अब तक चौधरी अजित सिंह का नाता सादाबाद से काफी गहरा रहा है।
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चौधरी अजित सिंह ने सादाबाद को मिनी छपरौली की संज्ञा दी थी। 2001 में चौधरी अजित सिंह ने भाजपा विधायक विशंभर सिंह के निधन के बाद हुए उपचुनाव में एक गरीब और पार्टी के प्रति निष्ठावान कार्यकर्ता रामसरन आर्य उर्फ लहेटू ताऊ को टिकट देकर उन्हें उपचुनाव लड़ाया।
उन्होंने रामसरन आर्य की जीत के लिए दिन रात एक कर दिया। इस उपचुनाव के दौरान सादाबाद विधानसभा क्षेत्र में उन्होंने 100 से अधिक सभाएं भी कीं। इसी चुनाव के दौरान जब वह ऊंचागांव में एक नुक्कड़ सभा को संबोधित कर रहे थे तो इस दौरान गांव में बवाल हो गया था। बवाल में दो युवक घायल हो गए थे।
इस घटना को लेकर चौधरी अजित सिंह आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए चौधरी चरण सिंह तिराहे पर हजारों कार्यकर्ताओं के साथ धरने पर बैठ गए थे। उच्चाधिकारियों द्वारा आश्वासन दिए जाने के बाद उनके द्वारा धरने को खत्म किया गया। इस उपचुनाव में रामसरन आर्य की जीत हुई।
इस उप चुनाव के दौरान एक नारा यह भी चर्चित हुआ था कि माल खाओ काऊ को, और वोट देओ ताऊ कूं। रामसरन आर्य की जीत ने उनके केंद्र में मंत्री बनने का मार्ग प्रशस्त कर दिया। अगले साल 2002 में प्रदेश में विधानसभा के चुनाव होने थे। तब अजित सिंह की पार्टी का गठबंधन भाजपा से हुआ और वह केंद्र की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में उद्योग मंत्री बन गए। (संवाद)
कार्यकर्ताओं से बना रहा सीधा संपर्क
वर्ष 1995 में हरित प्रदेश आंदोलन को लेकर उन्होंने लगातार दो दिन सादाबाद क्षेत्र में रहकर दर्जनों सभाएं कीं और 2001 के उपचुनाव के बाद चौधरी अजित सिंह का यहां के कार्यकर्ताओं का एक तरह से सीधा संपर्क बन गया था। जाट समाज के काफी लोग अजित सिंह से सीधे तौर पर जुड़ गए।
सादाबाद में राम राम सा करने का था अलग अंदाज
चौधरी अजित सिंह कड़क मिजाज के साथ हंसमुख और भावुक स्वभाव के भी थे। यहां आगमन के दौरान जब वह कार्यकर्ताओं से मिलते थे और उनका हालचाल पूछते थे तो कार्यकर्ताओं में उत्साह का संचार हो जाता था।
बृज की संस्कृति के अनुरूप यहां होने वाली चुनावी सभाओं या अन्य किसी सभा में सबसे पहले अपने भाषण की शुरुआत करने से पहले सभा में मौजूद जनसमूह को राम राम सा करना नहीं भूलते थे। सभा में आते ही उनकी राम राम सा को सुनने के लिए जनसमूह भी उतावला रहता था।
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प्रताप चौधरी के साथ ढाबे पर काटी थी रात
पूर्व विधायक प्रताप चौधरी ने अपनी यादें साझा करते हुए बताया कि एक बार जब राजस्थान के हिंडोन में जा रहे थे तो अचानक रास्ते में गाड़ी खराब हो गई तो चौधरी अजित सिंह ने एक ढाबे पर ही उनके साथ पूरी रात काटी। इसके अलावा सादाबाद के लोक निर्माण विभाग के गेस्ट हाउस जो कि काफी जीर्णशीर्ण था, में रुके और सादाबाद के कार्यकर्ताओं से रूबरू हुए।
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