जनपद में काफी संख्या में मैटल व लोहा कारोबारी हैं, जिनसे बड़ी मात्रा में मैटल स्क्रैप जाता है और बड़ी मात्रा में मैटल व लोहे की इंगट आदि आती हैं। हाथरस में मैटल व लोहा गलाने की कई फैक्ट्रियां भी हैं जो बड़े पैमाने पर कारोबार करती हैं। ऐसे में हाथरस में तीन फर्जी फर्मों के खुलासे से तमाम कारोबारियों में खलबली मची हुई है।
रेडीमेड गारमेंट्स कारोबार के नाम पर कराए गए पंजीकरण
हाथरस। रैकेट चलाने वालों ने पंजीकरण कराने के लिए पांच फीसदी कर वाले उत्पादन यानी रेडीमेड गारमेंट्स कारोबार यानी पांच फीसदी जीएसटी स्लैब वाले एचएसएन नंबरों को डाला था,जिससे पंजीयन अधिकारी आसानी से बिना किसी जांच के उसे स्वीकार लें।लोहा व मैटल आदि पर 18 फीसदी कर है, इनकी कर दर अधिक होने के कारण पंजीयन से पहले गंभीरता से जांच की जाती है। कारोबार में कच्चा माल यानी स्क्रैप आम लोगों के घरों से आता है, इसलिए इसकी इनपुट जांच मुश्किल होती है।
नेटवर्क के संचालकों की चल रही तलाश
सेंट्रल जीएसटी की टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क का संचालन किन व्यक्तियों के द्वारा किया जा रहा था और स्थानीय स्तर पर किसकी संलिप्तता रही। जांच रिपोर्ट मुख्यालय को भेज दी गई है, जहां से जल्द ही आर्थिक अपराध शाखा और आयकर विभाग के साथ संयुक्त कार्रवाई किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
हाथरस में भी कानपुर, लखनऊ, नोएडा, वाराणसी आदि की भांति मोबाइल नंबर 7678311461 पर तीन फर्म पाई गई हैं। इन फर्मों के पंजीयन बैक डेट से निरस्त कर दिए गए हैं। इसमें किसी प्रकार की कर चोरी नहीं की जा सकी है। अधिकारी पूरे रैकेट की जांच कर रहे हैं।-डोलटन फ्रांसिस, सहायक आयुक्त, सेंट्रल जीएसटी, अलीगढ़