उम्र के इस पड़ाव पर जब शरीर को सहारे और व्यवस्था को थोड़ी संवेदनशीलता की जरूरत होती है, तब जिले के बुजुर्गों को सरकारी सुविधाओं के लिए भी लंबी कतारों और धक्कों से गुजरना पड़ रहा है। अस्पताल में पर्चा और दवा, डाकघर में पेंशन का काम, बैंक में लेनदेन या रेलवे स्टेशन पर टिकट हर जगह बुजुर्गों के लिए बनी सुविधाएं कागजों में ज्यादा और जमीन पर कम नजर आती हैं। विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस पर शहर की व्यवस्थाओं की पड़ताल में बागला जिला अस्पताल से लेकर मुख्य डाकघर तक बुजुर्गों की परेशानी सामने आई। कहीं लाठी के सहारे लाइन में खड़े बुजुर्ग मिले तो कहीं ज्यादा देर खड़े न रह पाने पर जमीन पर बैठकर अपनी बारी का इंतजार करते दिखे। संवाद
अस्पताल : पर्चे से दवा तक लंबी कतार
बागला जिला अस्पताल में बुजुर्ग मरीजों को पर्चा बनवाने, डॉक्टर को दिखाने और दवा लेने के लिए अलग-अलग काउंटरों पर इंतजार करना पड़ता है। तमन्ना गढ़ी निवासी दुर्गा देवी ने बताया कि घुटनों में दर्द रहता है, लेकिन अस्पताल आने पर करीब एक घंटे लाइन में खड़ा होना पड़ता है। पर्चे से दवा लेने तक आधा दिन निकल जाता है। सरकारी व्यवस्था में बुजुर्गों के लिए प्राथमिकता कतार और जेरियाट्रिक सेवाओं का प्रावधान है, लेकिन अस्पताल में बुजुर्ग सामान्य कतार में ही खड़े नजर आए।
डाकघर : बारी का इंतजार, बैठने को जमीन
पेंशन और जमा रकम से जुड़े काम के लिए मुख्य डाकघर पहुंचने वाले बुजुर्गों को भी लंबा इंतजार करना पड़ता है। नगला भिकारी निवासी अस्सो देवी ने बताया कि अलग काउंटर तो दूर, बैठने की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। ज्यादा देर खड़े रहने की हिम्मत नहीं होती, इसलिए जमीन पर बैठकर बारी का इंतजार करना पड़ता है।
बैंक : काउंटर की सुविधा, इंतजार वही
बुजुर्गों के लिए बैंक शाखाओं में अलग काउंटर और कुछ सेवाओं के लिए घर बैठे सुविधा का प्रावधान है। इसके बावजूद जिले की कई शाखाओं में बुजुर्ग सामान्य कतार में ही काम कराने को मजबूर हैं। 70 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए डोरस्टेप बैंकिंग जैसी सुविधाओं की जानकारी और पहुंच भी सीमित है।
बस स्टैंड : सफर शुरू होने से पहले परेशानी
बस स्टैंड पर बुजुर्ग यात्रियों के लिए प्राथमिकता और आगे की सीटों की व्यवस्था है, लेकिन भीड़ में उन्हें सामान्य यात्रियों की तरह ही जूझना पड़ता है। बस में चढ़ने-उतरने के दौरान अतिरिक्त मदद की जरूरत होने के बावजूद कई बार उन्हें खुद ही सहारा तलाशना पड़ता है।
रेलवे स्टेशन : सुविधा है, पहुंच कितनी?
रेलवे स्टेशनों पर बुजुर्गों के लिए रैंप, लिफ्ट और व्हीलचेयर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रावधान हैं। लेकिन भीड़ के बीच टिकट लेने से लेकर प्लेटफॉर्म तक पहुंचने में बुजुर्गों को परेशानी होती है। जरूरत पड़ने पर व्हीलचेयर मिलना भी हर बार आसान नहीं होता।
कागज पर अधिकार, जमीन पर इंतजार
बुजुर्गों के लिए सरकारी व्यवस्थाओं में प्राथमिकता और सहूलियत के कई प्रावधान हैं। अस्पतालों में प्राथमिकता इलाज, बैंकों में अलग सेवा और डोरस्टेप बैंकिंग, डाकघर में प्राथमिकता, बसों में सीट और रेलवे स्टेशनों पर व्हीलचेयर-रैंप जैसी सुविधाएं तय हैं। लेकिन हाथरस में इन सुविधाओं की असली परीक्षा उन कतारों में होती है, जहां बुजुर्ग आज भी सामान्य व्यवस्था के भरोसे खड़े दिखाई देते हैं।
कानून भी देता है संरक्षण
अधिवक्ता मुन्ना सिंह पुंडीर ने बताया कि माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 समेत कई प्रावधान बुजुर्गों के अधिकारों की रक्षा करते हैं। सरकारी और निजी संस्थानों में उन्हें आवश्यक सुविधाएं और प्राथमिकता मिलनी चाहिए। अधिकारों का उल्लंघन होने पर वरिष्ठ नागरिक ट्रिब्यूनल और विधिक सेवा प्राधिकरण की मदद ले सकते हैं। प्रशासन को भी कागजी प्रावधानों का धरातल पर पालन सुनिश्चित कराना चाहिए।