संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
एडीजे एफटीसी प्रथम ने एक स्कूल संचालक को सात साल की कैद और अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड न देने पर उसे अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। इस स्कूल संचालक ने अपने स्कूल में तैनात शिक्षिका से यह कहकर शादी कर ली थी कि वह विवाहित है और उसका शारीरिक शोषण किया था, जबकि यह स्कूल संचालक पहले से ही विवाहित था। कोर्ट ने इस स्कूल संचालक को दुष्कर्म का दोषी माना है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार न्यायालय के आदेश पर थाना चंदपा के एक गांव में तैनात एक शिक्षिका ने यह मुकदमा दर्ज कराया कि वह इसी थाना क्षेत्र के एक गांव में एक स्कूल में शिक्षिका थी और मुकेश भारद्वाज इस स्कूल में संचालक था। संचालक ने उसे एक जुलाई 2009 बतौर प्राचार्य नियुक्त किया। शिक्षिका शिक्षाशास्त्र में स्नाकोत्तर है। इसके बाद संचालक ने शिक्षिका को यह बताया कि वह अविवाहित है और अपने झूठे झांसे में ले लिया। साजिश के तहत स्कूल संचालक ने कार्यालय सब रजिस्ट्रार हाथरस के यहां विवाह होने का झूठा प्रपत्र भरकर इस कार्यालय में पंजीकरण करा लिया। यह पंजीकरण उसने 15 अक्तूबर 2009 को कराया, जबकि शादी का कार्ड भी छपवाया।
इसमें शादी होना 11 फरवरी 2007 दर्शाया। आरोप है कि इस स्कूल संचालक ने ग्राम प्रधान से भी झूठे कागजात प्राप्त कर लिए। ग्राम प्रधान के कागजातों को भी रजिस्ट्रार हिंदू विवाह अधिनियम के अंतर्गत आवेदनों में प्रस्तुत किया। अभियोजन पक्ष के अनुसार स्कूल संचालक इस शिक्षिका से यही कहता रहा कि वह अविवाहित है, जबकि उसकी शादी पहले ही हो चुकी थी। ऐसे में यह स्कूल संचालक इस शिक्षिका से बलात्संग करता रहा। अभियोजन पक्ष के अनुसार इस स्कूल संचालक की टूंडला क्षेत्र की एक महिला से पहले ही शादी हो चुकी थी। उसका कोई तलाक नहीं हुआ था और उसके दो बच्चे भी इस महिला से हैं। ऐसे में उसने अपनी पहली पत्नी के जीवित रहते हुए शिक्षिका को धोखे में रखकर उससे अपने फर्जी विवाह का पंजीकरण कराया।
शिक्षिका के साथ यह विवाह धारा 5(1) हिंदू विवाह अधिनियम के तहत निष्प्रभावी व शून्य है। इस मामले की रिपोर्ट कोर्ट के आदेश पर विभिन्न धाराओं में थाना चंदपा में दर्ज की गई। पुलिस ने मामले की विवेचना की और आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया। मामले की सुनवाई एडीजे एफटीसी प्रथम सत्येंद्र सिंह वीरवान के न्यायालय में हुई। कोर्ट ने इस स्कूल संचालक मुकेश भारद्वाज को दोषी मानते हुए उसे धारा 376 आईपीसी में सात साल, धारा 420 मेें दो साल, धारा 468 में दो साल, 471 में दो साल की कैद की सजा सुनाई है। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। उसे अर्थदंड की सजा भी सुनाई गई है। अर्थदंड नहीं देने पर उसे अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी मुकेश कुमार चौधरी ने पैरवी की।