जनपद को टीबी मुक्त बनाने और संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा सुरक्षा चक्र तैयार किया है। टीबी प्रिवेंशन ट्रीटमेंट प्रोग्राम (टीपीटी) के तहत अब न केवल मरीजों का इलाज किया जा रहा है, बल्कि उनके बेहद करीब रहने वाले परिजनों को भी इस बीमारी की चपेट में आने से बचाने के लिए एडवांस में दवाइयां दी जा रही हैं।
जिले में इस समय पलमोनरी डीएसटीबी वाले 6,554 नोटिफाइड मरीज हैं, जिनके संपर्क में रहने वाले 13,480 परिजनों को इस सुरक्षा कवच के दायरे में लाकर स्वास्थ्य लाभ दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पहले टीबी प्रिवेंशन थेरेपी के तहत केवल टीबी मरीज के घर में रहने वाले पांच साल से छोटे बच्चों को ही रोग प्रतिरोधक दवाइयां दी जाती थीं, लेकिन अब इस नीति में बड़ा और सकारात्मक बदलाव किया गया है।
अब चिकित्सक की जांच और परामर्श के आधार पर टीबी मरीज के परिवार के सभी छोटे-बड़े सदस्यों को इस थेरेपी के दायरे में शामिल कर लिया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि मरीज के खांसने या छींकने से घर के अन्य सदस्यों में जो संक्रमण फैलने का खतरा रहता है, उसे पूरी तरह निष्प्रभावी किया जा सके।
क्या है पलमोनरी डीएसटीबी और क्यों है खतरा?
पलमोनरी टीबी वह स्थिति है, जिसमें मुख्य रूप से मरीज के फेफड़े प्रभावित होते हैं। फेफड़ों की टीबी (डीएसटीबी) के मरीज जब खांसते, छींकते या बात करते हैं, तो हवा के जरिये टीबी के बैक्टीरिया उनके आसपास रहने वाले करीबियों के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। यदि परिजनों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो, तो वे भी बहुत जल्द टीबी के एक्टिव मरीज बन जाते हैं। इसी खतरे को भांपते हुए स्वास्थ्य विभाग ने एक्टिव मरीजों के साथ-साथ उनके परिजनों को एडवांस प्रिवेंटिव दवाइयां देकर एक मजबूत सुरक्षा चक्र में बांध दिया है, जिससे उन्हें टीबी होने से बचाया जा रहा है।
नियमित देखभाल और काउंसिलिंग पर जोर
इस अभियान को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमें और डॉट्स प्रदाता लगातार मरीजों के घरों का दौरा कर रहे हैं। परिजनों को दवा देने के साथ-साथ उन्हें यह भी समझाया जा रहा है कि टीबी का मरीज पूरी तरह ठीक हो सकता है, बशर्ते उसका इलाज बीच में न छूटे।
टीपीटी का उद्देश्य जिले से टीबी की बीमारी का नाम-ओ-निशान मिटाना है। जिन परिवारों में टीबी के मरीज हैं, उनके परिजन बिना किसी डर या संकोच के स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा दी जा रही प्रिवेंटिव दवाइयों का सेवन निर्धारित समय तक जरूर करें। यह दवा पूरी तरह सुरक्षित है और भविष्य में होने वाले संक्रमण से बचाती है।
-डाॅ. प्रवीन भारती, जिला क्षय रोग अधिकारी