शहर के तालाब चौराहे के सुंदरीकरण के लिए प्रशासन के प्रयास फिर तेज हो गए हैं। नगर पालिका के ईओ व एडीएम के साथ शुक्रवार को डीएम अतुल वत्स ने अधूरे पड़े तालाब परिसर का निरीक्षण किया और यहां पीपीपी मॉडल पर संभावित विकास कार्यों के लिए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। इसके लिए समिति भी गठित की जाएगी।
नगर पालिका परिषद इस तालाब पर लगभग सात करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है। इसके बावजूद यहां काम अधूरा है। वर्ष 2019 में झांसी की कंपनी को तालाब के सुंदरीकरण का टेंडर दिया गया था। यहां से गंदा पानी निकालकर 15 फीट तक खोदाई की गई। साथ ही आरसीसी पिलर के साथ पैदल पथ बनाया गया।
तालाब का स्वरूप बदलकर इसे पूल का रूप दिया जा रहा था, जिसके लिए तल को पक्का कर दिया गया था। तालाब का स्वरूप बदलने पर इस मामले में कोर्ट में रिट डाली गई थी। इस संबंध में कोर्ट ने तत्कालीन पालिकाध्यक्ष से हलफनामा भी मांगा था। तब से यह काम अटका हुआ था। इधर, भुगतान न होने पर ठेकेदार कोर्ट चले गए थे। बाद में नगर पालिका को उनका भुगतान करना पड़ा।
पीपीपी मॉडल से परियोजना की तलाश
निरीक्षण के लिए पहुंचे डीएम अतुल वत्स ने गाजियाबाद व नोएडा की तर्ज पर पीपीपी मॉडल से यहां कोई परियोजना लाने का सुझाव दिया है, जिससे यदि यहां कोई प्रोजेक्ट आता है तो उसकी सही ढंग से देखरेख हो सके और लोगों को इसका लाभ मिल सके। यहां ई-रिक्शा व टेंपो की पार्किंग के साथ सार्वजनिक शौचालय आदि की भी व्यवस्था की जाएगी। इस प्रोजेक्ट की निगरानी के लिए समिति गठित करने के निर्देश भी डीएम ने दिए हैं, जिसमें ईओ के अलावा एडीएम, विधिक सलाहकार व किसी पुलिस अधिकारी को शामिल किया जाएगा।
हमारा उद्देश्य शहर को सुंदर बनाने के साथ-साथ नागरिकों को जाम मुक्त सड़कें देना है। पीपीपी मॉडल के जरिये तालाब का विकास न केवल शहर की शोभा बढ़ाएगा, बल्कि मनोरंजन का एक बेहतर केंद्र भी बनेगा। विधिक सलाह लेकर आगे की योजना तैयार की जाएगी।
-अतुल वत्स, जिलाधिकारी हाथरस