घने कोहरे के कारण कई गांवों में आलू की फसल पर पाला जमने लगा है। रात के समय खेतों में सफेद परत दिखाई देने लगी है। पाले के प्रभाव से आलू के पौधों की पत्तियां झुलसने लगी हैं, कई स्थानों पर पौधों की बढ़वार भी रुक गई है। इससे किसानों के चेहरे पर चिंता साफ दिखाई दे रही है, क्योंकि आलू की फसल को नुकसान होने की आशंका बढ़ गई है।
सादाबाद क्षेत्र के गांव धानौटी, कुरसंडा, करसौरा, बिसावर, मई, ताजपुर, बरामई, नौगांव, गीगला आदि में आलू की फसल पर पाला जमने से किसान परेशान है। किसानों का कहना है कि इस समय आलू की फसल संवेदनशील दौर में है। पाला पड़ने से पौधों की पत्तियां काली पड़ जाती हैं और प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया प्रभावित होती है, जिससे आलू का विकास रुक सकता है।
यदि यही स्थिति कुछ दिन और बनी रही तो पैदावार पर सीधा असर पड़ेगा और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। किसान पाले से बचाव के लिए रात में खेतों में सिंचाई कर रहे हैं, ताकि फसल पर जमी पाले की परत पिघल सके और तापमान का असर कम हो।
कुछ किसान धुआं कराकर फसलों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। इसके बावजूद अत्यधिक ठंड के कारण किसानों की चिंता कम नहीं हो पा रही है।
पाले से बचाव के लिए समय-समय पर हल्की सिंचाई करना सबसे प्रभावी उपाय है। इसके साथ ही खेतों में नमी बनाए रखने और हवा की गति कम करने के लिए मेड़ों पर धुआं करना भी सहायक होता है। विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर रखें और ठंड अधिक होने की स्थिति में सतर्कता बरतें।
खेतों में पाला जम रहा है, जिससे आलू की पत्तियां झुलसने लगी हैं। सिंचाई कर फसल को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। बीज, खाद और दवाओं पर काफी खर्च हो चुका है, अगर फसल खराब हुई तो किसान पूरी तरह टूट जाएगा।
-हरेंद्र सिंह, किसान धानौटी।
इस समय आलू की फसल बहुत नाजुक होती है। एक-दो दिन और पाला पड़ा तो पैदावार पर बड़ा असर पड़ेगा। अब नुकसान की चिंता सता रही है। फसल को बचाने के लिए धुआं कर रहे हैं, फिर भी पाले का असर दिख रहा है।
-अशोक कुमार, किसान धानौटी।