हाथरस। नगर पालिका बोर्ड की बैठक में कुछ सभासदों केे विरोध के बीच सभी प्रस्ताव पारित हो गए। सभासदों ने पेयजल संकट, गंदगी, निर्माण संबंधी कार्यों को लेकर जमकर हाय-तौबा मचाई और अपने-अपने वार्ड की समस्या प्रभारी ईओ और पालिकाध्यक्ष के समक्ष रखी। सभासदों का कहना था कि स्थिति यह है कि वह अपने वार्ड में जा भी नहीं पा रहे और जनता उनसे विकास के कामों का हिसाब मांग रही है।
नगर पालिका के टाउन हॉल में हुई इस बैठक की अध्यक्षता पालिकाध्यक्ष डौली माहौर ने की, जबकि प्रभारी ईओ के रूप में एडीएम उदयीराम खुद मौजूद थे। एडीएम के चार्ज लेने के बाद पालिका बोर्ड की यह पहली बैठक थी। बैठक में आवासीय परिसरों को निशुल्क विशिष्ट यूनीक आईडी नंबर देने का प्रस्ताव रखा गया तो इस पर कुछ सभासदों ने यह पूछा कि यह नंबर किस तरह से दिए जाएंगे। इस पर कर निर्धारण अधिकारी ने उन्हें विस्तार से जानकारी दी। यह प्रस्ताव पास कर दिया गया। कांशीराम शहरी गरीब आवास योजना प्रथम चरण के तहत बनी छह दुकानों को पालिका को हस्तांतरित करने, आवासीय, व्यवसायिक और अनावासीय भवनों के नामांतरण पर विक्रय मूल्य के आधार पर नामांतरण शुल्क निर्धारित करने, नगर में सफाई व्यवस्था हेतु आउटसोर्सिंग पर 80 सफाई मजदूरों के काम की अवधि बढ़ाए जाने, 20 एमएम माइक्रोन से कम की पॉलीथिन के प्रयोग को प्रतिबंधित करने के प्रस्तावों को पास करने पर सभासदों ने सहमति जता दी।
बोर्ड की बैठक में सभासद बाला शर्मा के प्रार्थना पत्र पर हर सभासद को प्रतिमाह यात्रा भत्ता 200 रुपये दिए जाने का जब प्रस्ताव रखा गया तो कुछ सभासदों ने इसका तीखा विरोध किया। इन सभासदों का कहना था कि वह 200 रुपये पालिका से नहीं लेना चाहते। पालिका उनके वार्ड की व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखे। उन्होंने तो उल्टे अपने खर्चे पर अपने वार्ड में सफाई कर्मचारी लगा रखे हैं। कुछ सभासदों में आपस में ही तीखी नोक -झोंक होेने लगी। बाद में इस प्रस्ताव को भी पास कर दिया गया। सबसे ज्यादा शोर राज्य वित्त आयोग की धनराशि 1.62 करोड़ से होने वाले 30 निर्माण कामों को लेकर मचा। नगर पालिका के स्टोरों के ऊपर निर्माण कार्य और स्वास्थ्य विभाग के गैरिज और बाउंड्रीवॉल के निर्माण संबंधी प्रस्ताव को अगली बैठक के लिए टाल दिया गया। निर्माण कार्यों में कुछ सभासदों ने भेदभाव बरतने का आरोप लगाया। सभासदों का कहना था कि उनके वार्डों में जानबूझकर निर्माण कार्य नहीं कराया जा रहा, जबकि कुछ वार्डों में कई-कई लाख के निर्माण कार्य हो रहे हैं।
सभासदों का यह भी कहना था कि ठेकेदार कब काम शुरू करते हैं और कब काम समाप्त हो जाता है, उन्हें पता ही नहीं चलता और कई काम तो बेहद घटिया स्तर के किए गए हैं। इस पर एडीएम ने कहा कि अब ठेकेदार निर्माण कार्य का बोर्ड लगाएगा। पालिका परिषद की चौकी चुंगियों की किराएदारी और पट्टे की अवधि बढ़ाए जाने के सिलसिले में आए प्रस्तावों के बारे में जब सभासदों को यह जानकारी मिली कि पट्टेदार और किराएदार किराया नहीं दे रहे तो सभासदों ने इनसे किराया वसूलने और फिर दोबारा से इनकी नीलामी कराने की मांग की।
बोर्ड में प्रस्ताव तो सारे पास हो गए, लेकिन उसके बाद सभासदों ने अपने-अपने क्षेत्र की समस्याएं बताना ईओ और चेयरमैन को शुरू किया। कुछ सभासदों का कहना था कि उनके इलाके में 6 महीने से पानी नहीं आ रहा। लोग पानी के लिए तरस रहे हैं। इंडिया मार्क टू नल खराब पड़े हुए हैं। पालिका के नलों में पानी नहीं आता। इसी प्रकार कुछ सभासदों ने गंदगी और जलभराव का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया और इसे लेकर शोर मचाया। बाद में एडीएम के निर्देश पर जेई केके अग्रवाल ने बताया कि शहर में पानी की किल्लत दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। नलों को रिबोर कराया जा रहा है और कुछ नलकूप ठीक कराए जा रहे हैं। बैठक में मनोज अग्निहोत्री, गजेंद्रपाल सिंह, देवेंद्र शर्मा, मनोज अग्रवाल, बाला शर्मा, रामजीलाल वर्मा, प्रदीप मोहन गौतम, वैभव गौतम, दीपा प्रेमी, राधा राज, मीना भारती, सुरेश चौधरी आदि मौजूद थे। संचालन लेखाकार यादवनाथ शर्मा ने किया।