हाथरस। उत्तर मध्य रेलवे के स्टेशन हाथरस किला पर ट्रेनों का संचालन स्टेशन मास्टर के स्थान पर पोर्टर (चपरासी) कर रहा है। स्थिति यहां तक खराब है कि यह पोर्टर ही स्टेशन पर टिकट वितरण का कार्य भी करता है। जिससे कई बार स्टेशन पर टिकट न मिलने के कारण यात्रियों को एचएडी ट्रेन में बगैर टिकट यात्रा करने को मजबूर होना पड़ता है। जिससे कई बार चेकिंग के बाद इन यात्रियों को जुर्माना भी भरना पड़ता है।
उत्तर मध्य रेलवे के स्टेशन हाथरस किला पर अधिक ट्रेनों का संचालन न होने के कारण, ट्रेनों के संचालन एवं टिकट वितरण का कार्य स्टेशन मास्टर द्वारा ही किया जाता है। लेकिन कमाल की बात तो यह है कि स्टेशन पर तैनात स्टेशन मास्टर स्टेशन की जगह सादाबाद क्षेत्र में अपने गांव में रहते हैं। जो स्टेशन से संचालित एक मात्र पैसेंजर ट्रेन एचएडी के समय में भी स्टेशन पर नहीं रहते है। क्योंकि यह ट्रेन सुबह 5.40 बजे रवाना होती है। उस समय स्टेशन मास्टर गांव से स्टेशन पर नहीं आ पाते। जबकि शाम को भी यह एचएडी पैसेंजर ट्रेन 10.40 बजे लौटती है। स्टेशन मास्टर गांव जाने की जल्दी में उस समय भी स्टेशन पर रहना पसंद नहीं करते है। स्टेशन मास्टर की अनुपस्थित में स्टेशन पर तैनात पोर्टर ही स्टेशन पर ट्रेनों का संचालन करता रहता है। जिससे कई बार यह स्टेशन पर एचएडी के सुबह दिल्ली के लिए रवाना होते समय ट्रेन का संचालन और टिकट वितरण एक साथ कर ही नहीं पाता है। जिससे अधिकांश यात्री टिकट न मिल पाने के कारण ट्रेन में सवार होकर बेटिकट ही दिल्ली के लिए एचएडी ट्रेन में सवार हो जाते है।