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डॉ. लक्ष्मीनारायण गर्ग को एक और उपलब्धि

Hathras Updated Sat, 22 Dec 2012 05:30 AM IST
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हाथरस। पद्मश्री कवि काका हाथरसी के बेटे और टैगोर सम्मान से विभूषित डॉ. लक्ष्मीनारायण गर्ग को राष्ट्रीय संगीत नाटक अकादमी ने राष्ट्रीय महत्व के व्यक्ति माना है। इसी के चलते आकाशवाणी केंद्र के आर्काइव विभाग ने डॉ. गर्ग की करीब छह घंटे की भेंट वार्ता को रिकार्ड करने का निर्णय लिया है। इसके तहत उनके संगीत, योग व चिकित्सा विज्ञान से संबंधित विविध क्षेत्रीय ज्ञान पर विदुषी लेखिका मंजरी सिन्हा उनसे लंबी जानकारी हासिल करेंगी।
गर्ग के साहित्यिक व संगीतमय सफर की यह रिकार्डिंग दिसंबर के अंतिम सप्ताह में होगी और बाद में इसे राजकीय स्तर पर पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया जाएगा। उनकी यह पुस्तक मीडिया के क्षेत्र में श्रव्य दृश्य के रूप में सुरक्षित रहेगी, जोकि भारत के कला जगत व भावी पीढ़ी को प्रेरणा देती रहेगी। साल की उम्र में भी वह लगातार लेखन कार्य में लगे हुए हैं। इसी महीने की शुरूआत में उन्हें उड़ीसा में संगीत विकास अवार्ड से भी नवाजा गया है। इस साल के अंदर उन्हें संगीत के क्षेत्र के लिए दो बड़े सम्मान मिले हैं, जोकि हाथरस के साहित्यिक व काव्य जगत के लिए बड़ी उपलब्धि कही जा सकती है। राष्ट्रीय महत्व का दर्जा मिलने पर डॉ. गर्ग कहते हैं कि यदि हम अपनी भाषा, अपनी संस्कृति और अपने संस्कारों से दूर हटते गए तो हम अपनी राष्ट्रीय पहचान तक खो बैठेंगे। उन्होंने कहा है कि भावी पीढ़ी को संस्कारहीन होने से बचाने के लिए विदेशी सांस्कृतिक आक्रमण का कड़ाई से मुकाबला करना होगा। चीन, रूस व जापान जैसे कई देश इसी संकल्प के सहारे अपनी सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करते आए हैं। डॉ. गर्ग की मानें तो उन्होंने अपनी विदेश यात्राओं में देखा है कि भारतीय संस्कृति को सभी जगह प्रतिष्ठा से देखा जाता है, जबकि अपने ही देश में लोग विदेशी संस्कृति के पीछे भाग रहे हैं। हम भूल गए हैं कि हम उन ऋषियों की संतान हैं, जिन्होंने विश्व को विद्याओं और कलाओं को ज्ञान दिया है।
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