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ऑनलाइन आंकड़ों से होगी स्कूलों की ग्रेडिंग

Wed, 20 Sep 2017 11:36 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, हाथरस।
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माध्यमिक शिक्षा परिषद की बोर्ड परीक्षा में ग्रेड पाने के लिए मान्यता प्राप्त विद्यालयों के संचालक खुद ही अपने जाल में फंसते दिखाई दे रहे हैं। परिषद की ऑनलाइन साइट पर विद्यालय संचालकों ने खुद ही अपने-अपने विद्यालयों के संसाधन ऑनलाइन किए थे, लेकिन अब इन आंकड़ों के आधार पर ही उनकी ग्रेडिंग हो रही है, जिससे बड़ी संख्या में वित्तविहीन विद्यालय परीक्षा केंद्र की दौड़ से बाहर होते दिखाई दे रहे हैं।
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वित्तविहीन विद्यालयों के संचालकों में बड़ी संख्या में विद्यालय ऐसे हैं, जो सिर्फ माध्यमिक शिक्षा परिषद की बोर्ड परीक्षा के लिए ही संचालित हो रहे हैं, क्योंकि इन विद्यालयों में नियमित रूप से पढ़ाई-लिखाई का कोई कार्य होता ही नहीं है, जबकि बड़ी संख्या में मान्यता प्राप्त ऐसे भी विद्यालय हैं, जिनमें पढ़ाई-लिखाई तो होती है, लेकिन उसके पास संसाधन काफी सीमित हैं।   इन विद्यालय संचालकों ने विभागीय अधिकारियों से किसी प्रकार आशीर्वाद प्राप्त कर विद्यालयों में पर्याप्त नेशनल बिल्डिंग कोड के हिसाब से कक्षा कक्ष एवं अन्य संसाधन नहीं होने के बावजूद हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की मान्यता प्राप्त कर ली है।
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अब इन स्कूल संचालकों ने ऑनलाइन किए गए विद्यालयों के भवन एवं सीसीटीवी कैमरा और आने-जाने के रास्ते को लेकर पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन खुद ही भरा था। अब परिषद ने ऑनलाइन रिकॉर्ड के आधार पर ही विद्यालयों को ग्रेड दिए जाने का निर्णय लिया है, जिससे अधिकांश स्कूल अब ए ग्रेड से खुद ही बाहर हो रहे हैं। स्कूल संचालक अब इस संकट से मुक्ति पाने के लिए भी जोर लगा रहे है, लेकिन रिकॉर्ड ऑनलाइन होने के कारण इससे फिलहाल मुक्ति पाना उनके लिए आसान नहीं है।
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-परिषद की नीति के अनुसार ग्रेडिंग की जा रही है। विद्यालय संचालकों ने खुद ही रिकॉर्ड ऑनलाइन किया है। इसका सत्यापन कराया गया है। जहां जो भी संशोधन होंगे, उनके संशोधन कर दिए जाएंगे।
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-जितेंद्र कुमार मलिक, डीआईओएस
 
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