जिले में बिजली के स्मार्ट मीटर लगाए जाने का काम तेजी से चल रहा है, लेकिन इसके साथ ही प्रीपेड उपभोक्ताओं पर लगातार बढ़ता बकाया बिजली निगम की चिंता बढ़ा रहा है। वर्तमान में जिले के लगभग 80 हजार प्रीपेड उपभोक्ताओं पर करीब 12 करोड़ रुपये का बकाया हो चुका है।
प्रीपेड मीटर का उद्देश्य उपभोक्ताओं को समय पर बिजली बिल भुगतान के लिए प्रेरित करना और बकाया की समस्या को कम करना था, लेकिन तकनीकी कारणों और प्रशासनिक आदेशों के चलते कई उपभोक्ता माइनस बैलेंस के बावजूद बिजली का उपयोग कर रहे हैं, जिससे बकाया में खूब इजाफा हो रहा है।
विद्युत महकमे की ओर से स्मार्ट मीटर लगाए जाने में दिक्कत न आने पर प्रीपेड मीटर में बैलेंस समाप्त होने या माइनस में जाने के बावजूद कनेक्शन विच्छेदन नहीं किए जा रहे। इन निर्देशों के चलते अब बकाया वसूली पर निगम सख्त रुख अपनाने का निर्णय भी नहीं ले पा रहा। उन्हें सिर्फ चेतावनी दी जा रही है।
इसके साथ ही उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर से जुड़े मोबाइल एप डाउनलोड करने के लिए भी जागरूक किया जा रहा है, ताकि वे अपने बिजली खर्च और बैलेंस की नियमित निगरानी कर सकें।
2.30 लाख में से 92 हजार लगे स्मार्ट मीटर
जिले में अब तक करीब 92 हजार स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जबकि कुल 2.30 लाख उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लगाए जाने का लक्ष्य है। यदि बकाया की स्थिति पर नियंत्रण नहीं हो पाया तो भविष्य में उनके कनेक्शन काटने के साथ जुर्माना व कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
उपभोक्ताओं को नहीं मिल रहे बिल व मेसेज
विद्युत महकमे की ओर से पहले स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं, उसके बाद चुपचाप कनेक्शन प्रीपेड किया जा रहा है। बकाया बढ़ने का मुख्य कारण यही है। प्रीपेड कनेक्शन होने के बाद बिल घर पहुंचाए जाने का प्रावधान नहीं है। वहीं कई उपभोक्ताओं के मोबाइल पर मेसेज भी नहीं आ रहे। ऐसे में उपभोक्ताओं को पता ही नहीं है कि उन पर कितना बकाया हो रहा है।
जिले में करीब 92 हजार स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जिन्हें लगातार प्रीपेड किया जा रहा है। इस कारण बकाया बढ़ रहा है। इसके लिए उपभोक्ताओं को जागरूक किया जा रहा है। बकाया जमा करने के लिए घर-घर जाकर ऊर्जावान व यूपीपीसीएल एप के बारे में जानकारी दी जा रही है, ताकि वे अपने कनेक्शन पर बिल संबंधी जानकारी आसानी से मोबाइल पर प्राप्त कर सकें।
-अजीत कुमार सिंह, अधीक्षण अभियंता विद्युत