जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के बैनर तले राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। इसमें विभिन्न प्रकृति के कुल 71,193 वादों का निस्तारण किया गया, जिसमें मोटर दुर्घटना प्रतिकर के 25 वादों का निस्तारण कर 2,07,75,000 रुपये प्रतिकर के रूप में दिलाए गए।
जनपद न्यायाधीश विनय कुमार-तृतीय ने दीप प्रज्जवलित कर इसका शुभारंभ किया। इस मौके पर सिविल के 34, पारिवारिक वाद के 21, विद्युत अधिनियम के 132 वादों का निस्तारण कर 84,000 रुपये अर्थदंड वसूला गया।
धारा 138 एनआई एक्ट के दो, 34,919 राजस्व वाद, जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के सात व लघु आपराधिक वादों के 3,945 मामलों का निपटारा किया गया। मोटर वाहन अधिनियम/चालानों के 3,460 वादों का निस्तारण किया गया। इन सभी में 2,54,430 रुपये अर्थदंड के रूप में वसूले गए।
बैंक ऋण के कुल 497 मामलों का निस्तारण कर 4,52,65,000 रुपये में समझौता दाखिल किया गया। बैंक के अन्य 20,790 मामले व विद्युत के 7,355 मामले एवं छह वादों का निस्तारण किया गया।
जनपद न्यायाधीश विनय कुमार-तृतीय के न्यायालय से पांच फौजदारी वादों का निस्तारण कर 2500 रुपये अर्थदंड के रूप में वसूले गए। प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय हाथरस बाबूराम के न्यायालय से कुल 21 पारिवारिक वादों का निस्तारण किया गया, जिनमें 10 जोड़े साथ-साथ राजी खुशी से अपने घर गए।
अध्यक्ष, स्थायी लोक अदालत हाथरस राजेश कुमार के न्यायालय से छह वादों का निस्तारण कर 1,12,800 रुपये प्रतिकर के रूप में दिलाए गए। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष राकेश कुमार-चतुर्थ के न्यायालय से सात वादों का निस्तारण कर 3,01,527 रुपये दिलाए गए।
विशेष न्यायाधीश, पॉक्सो अधिनियम कोर्ट संख्या एक, हाथरस निर्भय नारायन रॉय के न्यायालय से एक फौजदारी वाद का निस्तारण किया गया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट हाथरस सूरज मिश्रा के न्यायालय से 3,446 लघु आपराधिक वादों का निस्तारण कर 1,78,850 रुपये अर्थदंड के वसूले। सभी एसडीएम, तहसीलदार कोर्ट में भी वाद निस्तारित किए गए।
सादाबाद व सिकंदराराऊ में निस्तारित हुए वाद
सिकंदराराऊ में चार सिविल एवं 704 लघु आपराधिक वादों का निस्तारण कर 7,130 रुपये अर्थदंड में वसूले गए। सादाबाद में छह सिविल वादों एवं 164 लघु आपराधिक वादों का निस्तारण कर 8,910 रुपये अर्थदंड के रूप में वसूल किये गये। अपर सिविल जज(कप्र), सादाबाद के न्यायालय से 32 लघु आपराधिक वादों का निस्तारण कर 1500 रुपये अर्थदंड के रूप में वसूल किए गए।