शहर के 16 निजी अस्पतालों में इस साल अप्रैल से जुलाई तक 67 फीसदी प्रसव सिजेरियन हुए हैं, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन की आदर्श दर 10 से 15 फीसदी है। सरकारी अस्पतालों में सिजेरियन प्रसव की दर 10 फीसदी से भी कम है, जो कि संसाधनों के अभाव को दर्शाती है। दोनों ही आंकड़े प्रसूताओं की सेहत के लिहाज से चिंताजनक हैं।
अप्रैल से जुलाई तक शहर में कुल 1386 प्रसव हुए, जिनमें से 929 प्रसव सिजेरियन रहे। केवल जुलाई माह में 419 प्रसव हुए, जिनमें से 257 बच्चों ने ऑपरेशन के जरिये जन्म लिया। ग्रामीण क्षेत्र के 19 निजी अस्पताल हैं, जिनमें चार महीनों में 315 बच्चों ने जन्म लिया। इनमें 33 फीसदी यानी 103 सिजेरियन प्रसव थे।
ग्रामीण क्षेत्र के निजी अस्पतालों की दर शहरी से बेहतर है। ये आंकड़े बताते हैं कि बिना किसी चिकित्सकीय आवश्यकता या जटिलता के भी अनावश्यक ऑपरेशन किए जा रहे हैं। अप्रैल से जुलाई 2026 तक सरकारी अस्पतालों में कुल 5208 बच्चों ने जन्म लिया, जिनमें से केवल 4.43 फीसदी यानी 231 ही सिजेरियन किए गए हैं। यह आदर्श दर से काफी कम है।
सरकारी अस्पताल के आंकड़े दर्शाते हैं कि यहां संसाधनों की बेहद कमी है। जिला महिला अस्पताल में ही एक भी महिला रोग विशेषज्ञ नहीं है। रोस्टर के जरिये सादाबाद व सासनी सीएचसी के चिकित्सकों की यहां ड्यूटी लगी है।
कुछ अस्पतालों में 90 फीसदी सिजेरियन
यह बात तर्क संगत है कि निजी अस्पतालों में ही जटिल प्रसव के लिए लोग पहुंचते हैं, लेकिन हर प्रसव जटिल हो, यह संभव नहीं। कुछ निजी अस्पताल ऐसे हैं, जहां जुलाई में 90 फीसदी सिजेरियन हुए हैं। इगलास बाईपास रोड स्थित अस्पताल में 20 में से 18 प्रसव सिजेरियन रहे। वहीं मथुरा रोड स्थित अस्पताल में 15 में से 13 सिजेरियन रहे। इसी तरह अधिकतर में सिजेरियन दर 70 फीसदी ही रही है।
सरकारी अस्पतालों में सुविधाएं बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। जटिल मामले निजी अस्पतालों में ही पहुंचते हैं। साथ ही लोग भी अब सिजेरियन को अधिक सुरक्षित मानने लगे हैं, इसलिए भी आंकड़े बढ़ रहे हैं। कुछ निजी अस्पतालों के आंकड़े चिंताजनक हैं। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग आवश्यक कदम उठा रहा है। कुछ मामलों की रेंडम जांच कराई जाएगी।
-डाॅ. वेदप्रकाश, सीएमओ