जिला पोषण समिति के जरिए जिले के 56 गांवों को कुपोषण मुक्त करने के लिए 28 अधिकारियों ने इनको गोद लिया था। यह कार्ययोजना माह नवंबर 2017 में शुरू हुई थी। इसके तहत अब तक जिले के 49 गांवों को कुपोषण मुक्त कर लिया गया है।
इसकी रिपोर्ट बाल विकास परियोजना विभाग की ओर से शासन को भेज दी गई है। अब इन गांवों में जिलास्तरीय अधिकारियों की टीमें लगाकर सत्यापन शुरू कराया जाएगा। 0 से 5 वर्ष तक सभी बच्चों का मौके पर जाकर टीमें सत्यापन करेंगी।
कुपोषण मुक्त करने के लिए जिले के 6 विभागों की योजनाओं से इन गांवों को संतृप्त किया गया। पंचायती राज विभाग, फूड एंड प्रॉससिंग, आईसीडीएस, शिक्षा, हेल्थ, मनरेगा के तहत इन गांवों में कार्ययोजना को अमलीजामा पहनाया गया।
0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को वजन के आधार पर तीन ग्रुप में रखा गया है। इन बच्चों को लाल , हरा और पीला श्रेणी में रखा गया है। लाल अतिकुपोषित, पीला कुपोषित और हरा सामान्य श्रेणी में आता है।
कुपोषण मुक्त गांवों में कुपोषित बच्चे मिलने पर होगी कार्रवाई : डीएम
डीएम डॉ. रमा शंकर मौर्य ने कलेक्ट्रेट सभागार में राज्य पोषण मिशन के अंतर्गत संचालित जिला पोषण समिति की समीक्षा बैठक की। डीएम ने बच्चों के होने वाली आधी मृत्यु का कारण कुपोषण को बताया। उन्होंने सख्त निर्देश दिया कि कुपोषण मुक्त गांवों में पुन: कुपोषित बच्चे न मिले अन्यथा की स्थिति में कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जिले को कुपोषण मुक्त करने के लिए शिक्षा विभाग, पंचायती राज, आईसीडीएस, स्वास्थ्य, खाद्य एवं रसद तथा ग्राम विकास विभागों को एक साथ मिलकर काम करना होगा। इस अवसर पर जिला विकास अधिकारी मंजू श्रीवास्तव, सीएमओ बृजेश राठौर, जिला दिव्यांगजन एवं सशक्तीकरण अधिकारी प्रतिभा पाल, डीएसओ सुरेंद्र यादव, समस्त अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी, समस्त सीडीपीओ सहित अन्य संबंधित अधिकारीगण मौजूद थे।