सपा सरकार में समाजवादी पेंशन में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां सामने आई हैं। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद योगी सरकार ने इसकी जांच कराई तो जिले में 1566 ऐसे लोगों की पहचान हुई, जो अपात्र पाए गए हैं। हैरत की बात यह है कि इनमें से 410 पेंशनधारक हैं, जो इस दुनिया में है ही नहीं। मरने के बाद भी इनमें से कइयों के खाते में पेंशन की किश्त जा चुकी है, जिससे सरकारी खजाने को लाखों का चूना लगने का अनुमान है।
आशंका है कि योजना शुरू होने के बाद से अब तक तीन सालों में अपात्र लाभार्थियों ने करोड़ों की पेंशन हजम कर ली होगी। इनको चिह्नित करने के बाद समाज कल्याण विभाग की ओर से ऐसे पेंशनधारकों की पेंशन पर रोक लगा दी गई है और उनके नाम पेंशनार्थियों की सूची से अलग किए जा रहे हैं।
सपा सरकार ने 2014 के आम चुनाव से पहले समाजवादी पेंशन के नाम से यह योजना शुरू की थी। इसके तहत चिह्नित किए गए पात्र लोगों को 500 रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जानी थी। हर साल पेंशन को 50 रुपये प्रतिमाह बढ़ाया जाना था और इसे अधिकतम 750 रुपये प्रतिमाह किया जाना था। जिले में योजना के तहत 31038 लाभार्थियों का चयन कर उन्हें पेंशन दी जा रही थी।
सत्ता परिवर्तन के बाद योगी सरकार ने लाभार्थियों की पात्रता की जांच कराने का फैसला लिया। समाज कल्याण विभाग की ओर से प्रशासनिक अधिकारियों से पात्रों की जांच कराई गई। जांच के बाद चौकाने वाले तथ्य सामने आए। 1566 अपात्र फर्जी तरीके से पेंशन का लाभ उठा रहे थे। इसके बाद इनकी पेंशन पर रोक लगा दी गई।
समाजवादी पेंशन के पात्रों की जांच के दौरान पाया गया कई ऐसे लोगों के खाते में पेंशन जा रही है, जिनकी मौत हो चुकी हैं। इनके परिजनों की ओर से भी विभाग को कोई जानकारी नहीं दी गई कि पात्र की मौत हो चुकी है, इसलिए विभाग की ओर से अभी भी इन्हें पात्रों की श्रेणी में गिना जा रहा था। इनकी पेंशन पर भी रोक लगा दी गई।
योजना की जांच के दौरान कई चौकाने वाले तथ्य सामने आए। कई ऐसे लोग भी मिले जो दो-दो पेंशन योजना का लाभ उठा रहे थे। समाज कल्याण विभाग ने शासन को मामले की रिपोर्ट भेज दी है। फिलहाल योजना को होल्ड पर रखा गया है। किसी को भी समाजवादी पेंशन नहीं दी जा रही है।