मौसम में बदलाव के साथ ही जिले में बीमारियों का प्रकोप चरम पर है। जिला अस्पताल में इन दिनों मरीजों की भारी भीड़ उमड़ रही है। अव्यवस्था और संसाधनों की कमी का आलम यह है कि एक डाॅक्टर पर तकरीबन 300 मरीजों के इलाज व परामर्श का जिम्मा है। ऐसे में वह एक मरीज को एक मिनट का समय भी नहीं दे पा रहे।
अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 2000 से 2500 नए और पुराने मरीज पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल में स्वीकृत 25 पदों के सापेक्ष 13 चिकित्सक तैनात हैं। ओपीडी में एक बार में सात से आठ चिकित्सक मौजूद रहते हैं। ऐसे में औसतन एक चिकित्सक को एक दिन में 300 से अधिक मरीज देखने पड़ रहे हैं। सुबह से दोपहर तक चलने वाली ओपीडी में भीड़ इतनी ज्यादा होती है कि चिकित्सक मरीजों को एक मिनट भी नहीं दे पा रहे। बस लक्षण सुनकर पर्चे पर दवा लिखने तक ही परामर्श सीमित है।
वायरल में स्वाइन फ्लू के लक्षण, बढ़ी दहशत
अस्पताल पहुंच रहे अधिकांश मरीज तेज बुखार, सर्दी-खांसी, बदन दर्द और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत लेकर आ रहे हैं। वायरल बुखार से पीड़ित कई मरीजों में स्वाइन फ्लू जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं। मरीजों में लगातार तेज बुखार, गले में खराश और अत्यधिक कमजोरी की शिकायतें देखने को मिल रही हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग में भी खलबली मची हुई है।
पर्चा बनवाने से लेकर दवा तक लग रहे दो से ढाई घंटे
अस्पताल परिसर में बुधवार की सुबह आठ बजे से ही पर्चा बनवाने के लिए मारामारी देखने को मिली। ओपीडी व दवा काउंटर के बाहर भी लाइन लगी मिली। गांव लाड़पुर निवासी 70 वर्षीय किशनलाल ने बताया कि वह सुबह नौ बजे अस्पताल पहुंचे थे। दवा लेकर निकलने में उन्हें 11 बज गए। वहीं 55 वर्षीय रामस्वरूप निवासी लहरा ने बताया वे कई दिनों से बुखार से पीड़ित हैं। लगभग पौन घंटे में चिकित्सक को दिखा पाए। जांच का नंबर आया तो लंबी लाइन लगी हुई थी। तीन घंटे में वे अस्पताल से बाहर निकले।
मौसमी बीमारियों के कारण अचानक मरीजों की संख्या में कई गुना बढ़ोतरी हुई है। उपलब्ध संसाधनों में ही सभी मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने का प्रयास किया जा रहा है।
-डाॅ. सूर्यप्रकाश, सीएमएस