जिले में टीबी और एचआईवी से पीड़ित मरीजों की समय से पहचान और बेहतर इलाज के लिए स्वास्थ्य विभाग का विशेष अभियान लगातार जारी है। अगस्त में जिले के विभिन्न टीबी केंद्रों पर कुल 305 टीबी मरीजों की एचआईवी स्क्रीनिंग का लक्ष्य रखा गया था, जिसके सापेक्ष 283 मरीजों की जांच की गई। स्क्रीनिंग में तीन मरीज एचआईवी पॉजिटिव (रिएक्टिव) पाए गए।
विभाग ने तत्काल इन तीनों मामलों की पुष्टि करते हुए उन्हें एआरटी (एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी) सेंटर से जोड़कर इलाज शुरू कराया। यह तीनों मामले मुरसान, सादाबाद और सिकंदराराऊ टीबी इकाइयों से सामने आए हैं। जिला क्षय रोग विभाग ने क्रॉस रेफरल गतिविधियों के माध्यम से कई संदिग्धों की जांच कर उन्हें त्वरित उपचार सेवा से जोड़ा है।
आठ एचआईवी मरीज भी पाए गए टीबी से ग्रसित
इसी प्रकार एचआईवी मरीजों की टीबी स्क्रीनिंग (क्रॉस रेफरल) के दौरान भी सकारात्मक नतीजे देखने को मिले। अगस्त माह में जांच किए गए सभी आठ एचआईवी मरीज टीबी से ग्रसित पाए गए। स्वास्थ्य विभाग ने बिना किसी देरी के इन सभी आठ मरीजों को टीबी के उपचार से जोड़ दिया है।
टीबी और एचआईवी की संयुक्त स्क्रीनिंग का मुख्य उद्देश्य सह-संक्रमित मरीजों की शुरुआती चरण में पहचान करना है। इससे मरीजों को समय पर सही इलाज देकर उनकी जान बचाना आसान हो जाता है। जिले की सभी टीबी इकाइयों हाथरस, हसायन, महौ, मुरसान, सहपऊ, सादाबाद, सासनी और सिकंदराराऊ में यह स्क्रीनिंग प्रक्रिया नियमित रूप से चलाई जा रही है।
-डॉ. प्रवीण कुमार भारती, जिला क्षय रोग अधिकारी