न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हाथरस। इस साल कई बड़े घोटाले भी सामने आए। इनमें कई घोटालों में तो कार्रवाई हुई तो कई मामले दबा भी दिए गए। इन घोटालों की गूंज शासन तक भी पहुंची। रोडवेज का फर्जी टिकट घोटाला भले ही इगलास में पकड़ा गया हो, लेकिन इसके असली सूत्रधार हाथरस के ही थे। इसके अलावा खाद्यान्न घोटाला, डस्टबिन घोटाला, अमृत योजना, पौधरोपण और स्ट्रीट लाइट में हुए घपले सामने आए।
रोडवेज के फर्जी घोटाला यहां खासा सुर्खियों में रहा। फर्जी टिकट गिरोह का मास्टरमाइंड मेघ सिंह और देवेंद्र हाथरस डिपो में कार्यरत थे। पूरे मामले की जांच के बाद फर्जी टिकट प्रकरण में एआरएम जीएस शर्मा को सस्पेंड कर दिया गया। तमाम कर्मियों की संविदा समाप्त कर बाहर का दिखाया गया। कुल मिलाकर डिपो में 16 कर्मियों पर कार्रवाई हुई। इसके अलावा जिले में महज पांच आधार कार्डों से 1,064 राशन कार्डधारकों से खाद्यान्न की कालाबाजारी का घोटाला भी खासा चर्चित रहा। जांच के बाद नौ कोटेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। वहीं पौधरोपण खरीद में भी घोटाले को लेकर भी जांच शुरू हुई थी।
वहीं डस्टबिन खरीद में भी घोटाले करने में यह जिला पीछे नहीं रहा। यहां जिले की करीब 36 ग्राम पंचायतों में डस्टबिन की निर्धारित दरों से अधिक दरों पर खरीद की गई। इसे लेकर फिलहाल मंडल स्तर से जांच की जा रही है। वहीं नगर निकायों में भी स्ट्रीट लाइटों भी घोटाले की बू के कारण प्रभारी मंत्री के आदेश पर जांच कमेटी गठित की गई थी। अमृत योजना में पाइप लाइन खरीद में भी घोटाला सामने आया। इसकी जांच के आदेश तो हुए, लेकिन यह फाइलों में दब गई।