न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
जैसे-जैसे मतदान की तिथि नजदीक आती जा रही है, वैसे-वैसे जिला पंचायत अध्यक्ष पद को लेकर जोड़-तोड़ और तेज हो गई है। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर 22 जून को मतदान होगा। ऐसे में ओमवती यादव जहां अपनी कुर्सी बचाने के लिए जुगत लगा रही हैं, वहीं रामवीर उपाध्याय खेमा इसे लेकर यह तैयारी कर रहा है कि उनके परिवार का सदस्य फिर जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज हो जाए। सूत्रों की मानें तो ऐसे में जिला पंचायत के कुछ सदस्यों की मौज बहार आ गई हैं और इस जंग का जमकर फायदा उठा रहे हैं। कुछ सदस्य तो एक पिकनिक प्लेस पर ठहराए गए हैं। इस राजनीतिक जंग में हर फॉर्मूला इस्तेमाल किया जा रहा है।
इस बार जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव के बाद शुरू से ही घमासान रहा है। इस बार जब जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव हुआ तो शुरू में यहां पूर्व ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय के भाई विनोद उपाध्याय जिला पंचायत अध्यक्ष चुने गए, लेकिन उसके बाद उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित हो गया और सपा की जिलाध्यक्ष ओमवती यादव जिला पंचायत अध्यक्ष चुन ली गईं। लोकसभा चुनाव के बाद फिर घटनाक्रम बदला।
पिछले दिनों 25 में से 16 जिला पंचायत सदस्य डीएम के समक्ष पेश हुए। इन सदस्यों ने ओमवती यादव के खिलाफ अविश्वास जताते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान कराने की मांग की। इन सदस्यों के साथ पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय भी थे। डीएम ने 22 जून की तिथि इस प्रस्ताव पर मतदान के लिए नियत कर दी। हालांकि बाद में ओमवती यादव भी डीएम से मिली थीं और उन्होंने यह हवाला दिया था कि जिला पंचायत के कई मामले हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं, इसलिए अविश्वास प्रस्ताव को खारिज किया जाए। हालांकि जिला प्रशासन ने 22 जून की तिथि तय कर रखी है।
अब दोनों खेमों में जोड़-तोड़ तेज हो गई है। ओमवती यादव जहां अपनी कुर्सी पर आए संकट को टालने में लगी हैं। वहीं रामवीर उपाध्याय का परिवार यह चाहता है कि यह पद एक बार फिर उनके कब्जे में आ जाए। सूत्रों की मानें तो रामवीर का पलड़ा भारी है। जिला पंचायत के दर्जन भर सदस्य यहां से काफी दूर एक पिकनिक स्थल पर ठहरे हुए हैं। संभवत वह 22 जून को ही अविश्वास प्रस्ताव के दौरान यहां आएंगे। वहीं ओमवती यादव का खेमा इस कोशिश में जुटा है कि किसी भी तरह से यह प्रस्ताव पेश नहीं हो और खारिज हो जाए।