न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
सपा, बसपा और रालोद के संयुक्त रूप से लड़ने का फैसला यहां कोई गुल नहीं खिला सका। चुनावी आंकड़ों पर यदि नजर डाले तो इस बार तीनों दलों के संयुक्त गठबंधन प्रत्याशी रामजीलाल सुमन को कुल इतने वोट नहीं मिले, जितने मत तीनों दलों को पिछले लोकसभा चुनाव में अलग-अलग मिले थे। तीनों दलों का कुल वोट वर्ष 2014 में ज्यादा था, जबकि इस बार गठबंधन प्रत्याशी को पिछले जितना वोट नहीं मिला। यह बात दीगर है कि इस बार पिछले चुनाव वर्ष 2014 की अपेक्षा इस बार करीब 94 हजार वोटरों ने ज्यादा मतदान किया।
वर्ष 2014 के चुनाव में हाथरस संसदीय सीट से रालोद, बसपा और सपा अलग-अलग चुनाव लड़े थे। कांग्रेस ने रालोद का समर्थन किया था। उस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी राजेश दिवाक र को कुल 5,44,277 वोट मिले थे। उस समय उन्होंने अपने निकटतम प्रत्याशी बसपा के मनोज सोनी को 3,26,386 वोट से हराया था। उस चुनाव में बसपा के सोनी को 2,17,891 वोट मिले थे। सपा से प्रत्याशी रहे रामजीलाल सुमन को 1,80,891 वोट मिले थे। रालोद के निरंजन सिंह धनगर को 86,109 वोट मिले थे। यदि वर्ष 2014 के तीनों प्रत्याशियों के वोटों को मिला दिया जाए तो यह वोट 4,84,891 हैं।
इस बार सपा, बसपा, रालोद तीनों दलों ने मिलकर चुनाव लड़ा, लेकिन संयुक्त गठबंधन प्रत्याशी को कुल 4,24,091 वोट ही मिल सके। ऐसे में पिछले चुनाव में अलग-अलग लड़े तीनों दलों के प्रत्याशियों को ज्यादा वोट मिले थे, जबकि इस बार चुनाव लड़े गठबंधन प्रत्याशी को कम वोट मिले। ऐसे में तीनों दलों के वोट एकजुट नहीं हो सके और पिछले चुनाव की अपेक्षा इस बार 60,800 वोट कम मिले। यह वोट गटबंधन से छिटककर भाजपा में चला गया और भाजपा प्रत्याशी को इसका लाभ भी मिला।