पिछले आठ सालों में 1.42 करोड़ पौधे लगाए जाने के बावजूद जिले में हरियाली घट रही है। भारतीय वन संरक्षण की रिपोर्ट में हरियाली का प्रतिशत 1.25 से घटकर 1.20 फीसदी पर पहुंच गया है, जबकि वन क्षेत्र में भी 0.92 वर्ग किमी की कमी आई है। यह स्थिति चिंता पैदा करने वाली है।
पर्यावरण की सुरक्षा के लिए वन क्षेत्र का होना बहुत आवश्यक है। पिछले आठ सालों से लगातार हो रहे पौधरोपण के बाद भी जिले में हरियाली का आंकड़ा नहीं बढ़ा है। यह हाल तब है, जबकि पिछले आठ सालों में जिले में 1.42 करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं। यह जिला अवैध कटान में भी अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। बहुत कम वन क्षेत्र होने के बावजूद जिले में एक समय बड़े पैमाने पर हरे पेड़ों का कटान होता था।
पिछले कुछ वर्षों में आरा मशीनों पर अंकुश लगाए जाने के बाद स्थिति में कुछ हद तक सुधार तो हुआ है, लेकिन वन क्षेत्र में बढ़ोतरी नहीं हो पा रही। इसकी बड़ी वजह राष्ट्रीय राजमार्गाें के निर्माण के लिए जिले में लाखों की संख्या में पेड़ों की बलि चढ़ाना भी है।
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जिले में हरियाली अब सिर्फ 1.20 फीसदी
भारतीय वन सर्वेक्षण की रिपोर्ट कहती है कि वर्ष 2020 में वर्ष 2018 की अपेक्षा हरियाली में कोई इजाफा नहीं हुआ है। हाथरस में कुल भौगोलिक वन क्षेत्र 1840 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें बहुत अच्छे घनत्व के वन (ऐसा वन क्षेत्र, जिसमें आसमान सिर्फ 30 फीसदी या इससे कम दिखाई दे) बिल्कुल नहीं है। वहीं मध्यम घनत्व के वन (ऐसा वन क्षेत्र, जिसमें आसमान 70 फीसदी या उससे कम दिखाई दे) मात्र एक हेक्टेयर है। पूरा खुला हुआ वन क्षेत्र (ऐसा वन क्षेत्र, जहां से पूरा आसमान दिखाई दे) मात्र 22 हेक्टेयर है। वर्ष 2019 की रिपोर्ट में हरियाली क्षेत्र का प्रतिशत मात्र 1.25 बताया गया है। वहीं वर्ष 2021 की रिपोर्ट में भी वन क्षेत्र के प्रतिशत में कोई इजाफा नहीं हुआ है। वर्ष 2023 की रिपोर्ट में हरियाली 0.05 फीसदी से घटकर 1.20 पहुंच गई है। वर्ष 2025 की रिपोर्ट आने का अभी इंतजार किया जा रहा है।
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17.48 किमी ही बचा है वन क्षेत्रवर्ष 2023 से पहले तक जिले में कुल 1840 हेक्टेयर यानि कुल 18.40 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र थाा। इसमें भी 0.92 वर्ग किलोमीटर की कमी आई है। जिले में अब 17.48 वर्ग किलोमीटर यानि 1748 हेक्टेयर ही वन क्षेत्र बचा है।
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जिले में हरित पट्टियों का हाल बेहाल
जिले में वन विभाग के साथ ही नगर पालिका व नगर पंचायतों के अलावा अन्य विभागों ने हरित पट्टियां बनाई हैं, लेकिन इनकी भी हालत कुछ खास अच्छी नहीं है। रखरखाव के अभाव में यहां सिर्फ सूखी लकड़ियां ही नजर आती है। हालात ये हैं कि खुद से ही जो पौधे पनप गए हैं, वह ही बचे हैं, लेकिन न पनपने वाले पौधों की ओर किसी का ध्यान नहीं है।
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जनपद में वर्ष वार पौधरोपण
वर्ष 2017 में 3.5 लाख पौधे रोपे गए।
वर्ष 2018 में 5.2 लाख पौधे रोपे गए।
वर्ष 2019 में 19.00 लाख पौधे रोपे गए।
वर्ष 2020 में 17.30 लाख पौधे रोपे गए।
वर्ष 2021 में 25.75 लाख पौधे रोपे गए।
वर्ष 2022 में 26.65 लाख पौधे रोपे गए।
वर्ष 2023 में 20.14 लाख पौधे रोपे गए।
वर्ष 2024 में 24.70 लाख पौधे रोपे गए।
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तीन एनएच व एक एक्सप्रेस वे की भेंट चढ़े हजारों पेड़
जिले में पिछले सालों में हुए विकास कार्यों में हजारों हरे पेड़ों की बलि चढ़ गई। जिले से गुजरने वाले एक एक्सप्रेस वे के साथ तीन राष्ट्रीय राजमार्गाें के निर्माण में अब तक करीब 40 हजार हरे पेड़ों का कटान हो चुका है। जिले से गुजरने वाले यमुना एक्सप्रेस वे, आगरा-अलीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग, दिल्ली-कानपुर राष्ट्रीय राजमाार्ग के अलावा अब मथुरा-बरेली राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के लिए पेड़ों का कटान किया गया।
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पेड़ कटेंगे हाथरस में, पौधे रोपे जाएंगे आगरा में
जिले का हरियाली प्रतिशत बढ़ने का नाम नहीं ले रहा। इसकी एक वजह यह भी है कि जिले में विकास के नाम पर होने वाले पेड़ों के कटान के अनुपात में पौधरोपण आगरा में किया जा रहा है। इसकी मुख्य वजह ये है कि पौधे रोपने के लिए हाथरस में अब जमीन नहीं है। ऐसे में कटान के एवज में रोपे जाने वाले पौधों के लिए आगरा में जमीन मुहैया कराई जा रही है। ऐसे में आगरा की हरियाली बढ़ेगी, लेकिन हाथरस की घटेगी।
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जिले में पर्यावरण को बचाए जाने के लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं। हाथरस से होकर गुजरने वाले कई राजमार्गाें के लिए पेड़ों का कटान किया गया है। इसकी गणना अलग प्रकार की तकनीक से की जाती है, इसलिए वन क्षेत्र के प्रतिशत में कमी दिखाई दे रही है।
-डाॅ. सीपी सिंह, प्रभागीय वनाधिकारी, हाथरस।