फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उपकरण बने कबाड़, कैसे साफ होगा शहर

विज्ञापन
विज्ञापन
ब्यूरो, अमर उजाला, हाथरस
विज्ञापन


नगर पालिका परिषद में शहर को साफ रखने के लिए संसाधनों की कोई कमी नहीं है, फिर भी संसाधनों का प्रयोग नहीं होने के कारण करोड़ों रुपये के उपकरण धूल फांक रहे हैं। पिछले पांच साल में नगर पालिका द्वारा सीवर जेटिंग मशीन, शहर में कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करने की मशीन, कूड़ेदान उठाने के लिए लिफ्टिंग मशीन, टेंपो, रिक्शा मय डस्टबिन की खरीद हुई है। इन उपकरणों की खरीद पर नगर पालिका द्वारा करोड़ों की धनराशि खर्च की गई है, फिर भी रिक्शा और टेंपो से नियमित कूड़ा भी नहीं उठ रहा है।

सीवर जेटिंग मशीन की बात करें तो पालिका अधिकारी इसे चालू हालत में बताते हैं, लेकिन शहर के चौक सीवर लाइनों को खोलने के लिए यह नहीं निकाली जाती है। कई सभासदों ने इस संबंध में आला अधिकारियों से भी शिकायतें की हैं। चेयरमैन और नगर पालिका अधिकारी हर बार यह बात कह कर पल्ला झाड़ लेते हैं कि कर्मचारियों की कमी के कारण उक्त उपकरण खड़े हैं। सीवर जेटिंग मशीन चलाने के लिए टेक्निशियन की आवश्यकता पड़ती है। सभासदों ने कई बार महंगे उपकरण खरीदने में चेयरमैन और पालिका अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के भी गंभीर आरोप लगाए हैं। इस बात को लेकर हर बार बोर्ड बैठक में हंगामा भी होता है। सभाद मनोज अग्निहोत्री ने कीमती उपकरणों की खरीद में हुए भ्रष्टाचार की जांच कराए जाने की भी मांग की थी।
विज्ञापन

----
70 लाख की सिग्नल लाइट हो गई कबाड़
नगर पालिका द्वारा लगभग 70 लाख खर्च करके तालाब चौराहे पर ट्रैफिक सिग्नल लाइटें लगाई गई हैं। यह भी दो साल से अधिक समय से लगी हुई धूल फांक रही हैं। आगरा, अलीगढ़, बरेली और मथुरा मार्ग पर लाइटें लगवाई गई हैं। तालाब चौराहे पर सिग्नल लाइट लगाने से पूर्व रेलवे से अनुमति नहीं ली गई थी। यदि रेलवे से अनुमति ले ली जाती तो लाखों रुपये की कीमती सिग्नल लाइटें शोपीस बनकर नहीं खड़ी होतीं। पालिका के ही सूत्रों की मानें तो सिग्नल लाइट संचालन के लिए रेलवे ने अभी तक अनुमति नहीं दी है और न ही आने वाले समय में अनुमति मिलने की संभावना है।
विज्ञापन

---
-शहरवासियों की सुविधा के लिए कीमती उपकरण खरीदे गए हैं, लेकिन नगर पालिका में कर्मचारियों की काफी कमी है। काफी कर्मचारी रखे जाने हैं। पर्याप्त कर्मचारी होने के बाद सभी उपकरणों का प्रयोग होगा और शहर की सफाई व्यवस्था भी दुरुस्त होगी। ट्रैफिक सिग्नल लाइट का संचालन कराए जाने के भी प्रयास किए जा रहे हैं। रेलवे से अनुमति मिलने की देरी है।
-डौली माहौर, चेयरमैन हाथरस
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें