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जिले में दम तोड़ रही सरकारी स्वास्थ्य सेवा

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जिले में दम तोड़ रहीं सरकारी स्वास्थ्य सेवा
क्रासर
स्वास्थ्य विभाग पर न पर्याप्त संसाधन, न चिकित्सक
अमर उजाला ब्यूरो
हाथरस। जिले में स्वास्थ्य सेवाएं दम तोड़ रही हैं। संक्रामक रोगों का कहर शुरू हो गया है। विभाग के पास न तो पर्याप्त संसाधन हैं और न ही चिकित्सक हैं। सरकारी इलाज की उम्मीद रखने वालों को निराशा हाथ लग रही है।
मौसम का बदला हुआ मिजाज संक्रामक रोगों को बढ़ावा दे रहा है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग को और ज्यादा अलर्ट होना चाहिए, लेकिन यहां तो उल्टा हो रहा है। जिला अस्पताल में हर दिन एक हजार से अधिक मरीज आ रहे हैं, जिसमें 60 से 70 फीसदी मरीज संक्रामक रोग के होते हैं, लेकिन यहां पर उन्हें इलाज के नाम पर कुछ नहीं मिल रहा है। वहीं दो दिन गिनी चुनी दवाएं ही हर मरीज को दी जा रही हैं, जिसके कारण स्वास्थ्य लाभ मरीजों को नहीं हो रहा है। ऐसे में मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों को रुख करना पड़ रहा है।
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डेंगू के उपचार की कोई व्यवस्था नहीं
कहने को तो जिला अस्पताल में डेंगू की प्राइमरी जांच की सुविधा मौजूद है। संक्रामक रोगों का प्रकोप शुरू हुए डेढ़ महीने से अधिक समय हो गया है, लेकिन उनमें से एक भी मरीज की डेंगू की प्राइमरी जांच जिला अस्पताल प्रशासन ने नहीं कराई है। इसे अनदेखी कहें तो गलत नहीं होगा।
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जन औषधि केंद्र खुला, फिर भी दवाओं का टोटा
जिला अस्पताल में जन औषधि केंद्र मरीजों को कम कीमत पर सभी दवाएं उपलब्ध कराए जाने के लिए खुल तो गया, लेकिन इस केंद्र पर चंद दवाएं ही उपलब्ध हैं, जबकि 700 से अधिक दवाएं यहां पर उपलब्ध होनी चाहिए। मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।
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डिजिटल एक्सरे मशीन बनी सफेद हाथी
जिला अस्पताल में डिजिटल एक्सरे मरीज आए महीनों हो गए, लेकिन इसकी शुरुआत अभी तक नहीं हो सकी है। अभी यह मशीन कम तक चालू होगी, इस बारे में भी विभागीय अधिकारी कुछ भी स्पष्ट नहीं कह पा रहे हैं। कुल मिलाकर हर तरफ से मरीज परेशानी में हैं।
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एसएनसीयू वार्ड बना शोपीस
लाखों रुपये खर्च करके जिला महिला अस्पताल में एसएनसीयू (न्यू सिक बेबी केयर यूनिट) वार्ड तक बन गया, लेकिन इसकी सुविधा जरूरतमंदों को नहीं मिल पा रही है। हाल में जन्मे बच्चों को प्राइवेट अस्पतालों में ही भर्ती कराया जाता है। क्योंकि यहां पर शिशुओं की देखभाल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।
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दोनों अल्ट्रासाउंड मशीनें खराब
जिला अस्पताल में इस उम्मीद के साथ दो अल्टसाउंड मशीन लगाई गईं कि लोगों को सुविधा मिलेगी, लेकिन यह मरीज ढाई महीने से अधिक समय से सफेद हाथी साबित हो रही हैं। जिम्मेदार इन दोनों अल्ट्रासाउंड मशीनों को ठीक कराने को गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं।
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मरीजों को अस्पताल में सभी सुविधाएं दिए जाने की कोशिश की जा रही है। अल्ट्रासाउंड मशीन का जो पार्ट खराब हो गया है, उसे मंगवाने के लिए डिमांड भेजी गई है। एसएनसीयू वार्ड में बिना बाल रोग विशेषज्ञ के बच्चे को भर्ती नहीं किया जा सकता है। डिजिटल एक्सरे मशीन को इंस्टॉल करा कर शुरू करा दिया जाएगा।
-डॉ. बृजेश राठौर, सीएमओ
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