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वर्कशॉप में खड़ी रही रोडवेज बसें-Cordination

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न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस
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हाथरस। रोडवेज में फर्जी टिकट बनाने वाले रैकेट के पकड़े जाने का असर त्योहार पर रोडवेज बसों के परिचालन पर भी दिखाई दिया। इस घटनाक्रम के बाद रोडवेज के हाथरस डिपो के 14 कर्मियों की बर्खास्तगी के बाद रक्षाबंधन के त्योहार पर यहां डिपो के वर्कशाप में 9 बसें खड़ी रहीं। इन बसों के संचालन के लिए चालक और परिचालक नहीं मिले। बसों के कम आवागमन होने की वजह से यात्री भी परेशान दिखे।

उल्लेखनीय है कि पांच दिन पहले इगलास में एसटीएफ ने रोडवेज के फर्जी टिकट बनाने वाले गैंग को दबोचा था। इस गैंग का मुखिया देवेंद्र हाथरस डिपो में परिचालक था। गैंग का मास्टरमाइंड मेघ सिंह भी इसी डिपो में बुंकिग क्लर्क था। इसी मामले को लेकर शनिवार को एआरएम हाथरस ने 14 संविदा कर्मियों को बर्खास्त कर दिया। हालांकि कारण रोडवेज बसों के परिचालन में इनकी लापरवाही दिखाई गई लेकिन यह माना जा रहा था कि यह बड़ी कार्रवाई इस गैंग के पकड़े जाने का ही परिणाम है।
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जिन कर्मियों की संविदा समाप्त की गई, उनमें आठ परिचालक व छह चालक थे। ऐसे में रक्षाबंधन पर यहां नौ बसें नहीं चलीं। इसकी वजह इन कर्मियों की संविदा समाप्त होना था। वैसे भी रोडवेज की स्थानीय डिपो में पहले से ही 17 चालक व परिचालक कम हैं। अब इन कर्मियोें की संविदा समाप्त होने पर काफी बसों का परिचालक बंद रहा। इसका असर त्योहार पर भी पड़ा। रोडवेज की बसें अपेक्षाकृत कम संख्या में चलीं तो यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। वैसे एआरएम जीएस शर्मा का कहना है कि डिपो ने त्योहार पर काफी कमाई की है। कुछ बसों के खड़ी रहने पर उन्होंने कहा कि कर्मियों की संविदा समाप्त होने की वजह से यह बसें नहीं चल पाईं। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी तरह की गड़बड़ी नहीं होने दी जाएगी।
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एआरएम जीएस शर्मा ने दो और संविदा कर्मियोें की सेवा समाप्त कर दी हैं। इसमें एक परिचालक लंबे समय से गैरहाजिर था, जबकि दूसरा बस चालक ड्यूटी करने में असमर्थता व्यक्त कर चुका था। ऐसे में अब दो दिन में हाथरस डिपो में 16 कर्मियों की सेवा समाप्त की जा रही है। यह सेवा समाप्ति भी इसी प्रकरण से जोड़कर देखी जा रही है। अधिकारियों को अब यह आशंका सता रही है कि त्योहार के बाद कहीं मामले की गाज उन पर न गिर जाए। वैसे एआरएम जीएस शर्मा का कहना है कि इन दोनों की संविदा तो इसलिए समाप्त की गई है ताकि इनके बदले दूसरे कर्मियों की डिमांड की जा सके।
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