हरदोई। देहात कोतवाली क्षेत्र के बंदरहिया में सोमवार आधीरात को कच्ची दीवार ढह गई। मलबे में दबकर फेरी लगाने वाले की मौत हो गई। उनकी पत्नी और मासूम बेटी की हालत गंभीर है। दोनों का इलाज मेडिकल कॉलेज में चल रहा है।
बंदरहिया निवासी महबूब (35) फेरी लगाकर चूड़ी बेचते थे। वह पत्नी नफीसा (33) और तीन बच्चों रजा हुसैन (5), खैरुन्नीसा (3) और निशा (18 माह) के साथ रहते थे। पड़ोस में रहने वाले उनके बड़े भाई रज्जाक ने बताया कि सोमवार रात सभी सो रहे थे। आधीरात में मकान की कच्ची दीवार भरभराकर ढह गई। इसके मलबे के नीचे महबूब, नफीसा और निशा दब गईं।
चीख पुकार सुनकर वह लोग मौके पर पहुंच गए। कुछ पड़ोसी भी आ गए। सबने मिलकर मलबा हटाया। इसके बाद महबूब, नफीसा और निशा को मेडिकल कॉलेज ले गए। यहां चिकित्सक ने महबूब को मृत घोषित कर दिया। नफीसा और निशा की हालत गंभीर है। चिकित्सकों ने निशा को हायर सेंटर ले जाने की सलाह दी है। कोतवाल समर बहादुर सिंह ने बताया कि घटना संज्ञान में है। दीवार गिरने के कारण घटना हुई है।
मासूम रेफर फिर भी परिजन नहीं ले जाए पाए हायर सेंटर
मलबे में दबकर 18 माह की मासूम निशा गंभीर रूप से घायल है और उसकी हालत चिंताजनक बताई जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि उसे हायर सेंटर के लिए रात में ही रेफर कर दिया गया था। मंगलवार दोपहर तक परिजन उसे लेकर नहीं गए। बता दें कि मलबे में दबने से पिता की मौत हो चुकी है जबकि मां का कमर के नीचे का हिस्सा काम नहीं कर पा रहा है। ऐसे में अब मासूम को बेहतर उपचार के लिए ले जाने वाला कोई नहीं है। मासूम पीकू वार्ड में भर्ती है और डॉक्टरों ने हालत गंभीर बताई है। वहीं दोनों बच्चे रजा हुसैन और खैरुन्निशा का भी माता-पिता के बिना रो-रोकर बुरा हाल है।
लघुशंका के लिए गए थे रजा और खैरुन्निशा, बाल-बाल बचे
महबूब अपने पूरे परिवार के साथ कच्ची दीवार के पास ही सोए थे। रात लगभग 12 बजे रजा हुसैन और खैरुन्निशा लघुशंका जाने के लिए जाग गई थीं। घर के बाहर दोनों लघुशंका के लिए गए थे। इस दौरान दीवार ढह गई। अगर यह लोग भी वहां लेटे होते तो यह भी घायल हो जाते।
फोटो- 12- महबूब। फाइल फोटो
फोटो- 12- महबूब। फाइल फोटो
फोटो- 12- महबूब। फाइल फोटो