किसानों के हितों के लिए हर स्तर पर आवाज बुलंद करने
के लिए एक साथ प्रेस कांफ्रेंस करने वाले अलग-अलग संगठनों के लोगों ने साफ
तौर पर कहा कि किसानों के हितों के मुद्दों पर एक राय हैं न कि संगठन के
स्तर पर। कवि वेदवृत बाजपेयी ने इस बात को लेकर सफाई भी दी कि वे भाजपा के
आजीवन कार्यकर्ता हैं और भाजपा से अटूट बंधन है।
निरीक्षण भवन में
पत्रकारों से लखनऊ से आए किसान मंच के प्रदेश अध्यक्ष शेखर दीक्षित ने कहा
कि उन्होंने कभी खेती किसानी तो नहीं की, पर किसानों के हक के लिए आवाज
बुलंद करने को ही उन्होंने अपना लक्ष्य बना लिया है। उन्होंने कहा कि 13
साल से वे किसानों के हितों के लिए कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि
किसानों का हितैषी बनने के लिए जरूरी नहीं है कि खेतों में हल चलाया जाए या
फिर किसानों की परंपरागत वेशभूषा को अपनाया जाए। कहा कि अपनाना है तो
किसानों के दर्द को अपनाओ उन्हें शिक्षा एवं स्वास्थ्य तथा विकास के लिए
प्रेरित करो। कवि वेदवृत बाजपेयी ने कहा कि देश के किसानों ने अपनी मेहनत
से अनाज उपलब्धता की तस्वीर बदली है।
उन्होंने कहा कि जिस देश में
विदेशों से अनाज मंगाना पड़ता था, वहां आज हजारों क्विंटल अनाज रैकों में
सड़ जाता है। पिछले कुछ समय से भाकृद के बैनर तले किसानों के लिए आवाज
बुलंद करने वाले कवि ने सफाई दी कि वह सिर्फ किसानों के हितों के लिए अपनी
आवाज दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भाजपा के अलावा किसी और दल से उनका कोई
राजनीतिक सरोकार नहीं है। भाकृद प्रमुख सरोज दीक्षित ने कहा कि किसानों की
कई समस्याओं को लेकर 31 जुलाई को होने वाला धरना प्रदर्शन पूर्व राष्ट्रपति
एपीजे कलाम के निधन के चलते स्थगित कर दिया गया है।