हरदोई। ग्राम पंचायतों में काम के अनुमाेदन की अनिवार्यता जिम्मेदारों के लिए मायने नहीं रखती है। निर्वाचित प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को पूरा होने के बाद 27 मई से जिले में ग्राम पंचायतों में बिना अनुमोदन के ही काम और भुगतान किए जा रहे हैं। करीब 32 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है।
निर्वाचित प्रधानों का कार्यकाल पूरा होने पर 27 मई को निवर्तमान प्रधान और सहायक विकास अधिकारियों को प्रशासक नामित किया गया है। प्रशासक के साथ पंचायत सचिव कामकाज संभाल रहे हैं। पंचायतीराज विभाग ने इसी के साथ व्यवस्था दी है कि प्रशासकों के माध्यम से कराए जाने वाले कामों की कार्ययोजना को डीपीआरओ के माध्यम से डीएम से अनुमोदित कराया जाएगा। अनुमोदन की अनिवार्यता को दरकिनार कर काम और भुगतान किए जा रहे हैं।
19 विकास खंड की 1,293 में से 988 ग्राम पंचायतों ने प्रधान पद का कार्यकाल पूरा होने के बाद प्रशासक बनने के बाद 27 मई से 20 सितंबर तक भुगतान किए हैं। इन ग्राम पंचायतों ने 14,662 बार में करीब 34.19 करोड़ रुपये के भुगतान के ऑर्डर पीएफएमएस पर किए हैं। इसमें से 32.753 करोड़ रुपये का भुगतान हो गया है जबकि 52.80 लाख रुपये का भुगतान लंबित श्रेणी में है और 91.40 लाख रुपये का भुगतान रिजेक्ट हो गया है।
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ग्राम पंचायतों की तरफ से किए गए भुगतान पर ब्लॉकवार एक नजर
ब्लॉक : ग्राम पंचायत की संख्या : भुगतान (करोड़ रुपये में)
अहिरोरी : 57 : 2.188
बावन : 58 : 2.051
बेहंदर : 59 : 1.671
भरावन : 62 : 2.256
भरखनी : 68 :1.993
बिलग्राम : 38 : 1.421
हरियावां : 42 : 1.855
हरपालपुर : 45 : 0.999
कछौना : 34 : 1.319
कोथावां : 47 : 2.003
माधौगंज : 52 : 1.152
मल्लावां : 40 : 1.041
पिहानी : 61 : 1.642
सांडी : 51 : 1.567
संडीला : 63 : 2.294
शाहाबाद : 69 : 2.162
सुरसा : 50 : 1.909
टड़ियावां : 54 : 2.235
टोडरपुर : 38 : 0.992
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27 मई से प्रशासक नामित हैं। कामों की कार्ययोजना के अनुमोदन की अनिवार्यता है यदि बिना अनुमोदन के काम और भुगतान किए जा रहे हैं तो कार्रवाई की जाएगी। ई-ग्राम स्वराज पर काम और भुगतान दोनों प्रदर्शित हो रहे हैं। गड़बड़ी पर जवाबदेही तय की जाएगी। -श्रेया उपाध्याय, जिला पंचायत राज अधिकारी