हरदोई। पेड़ों के अंधाधुंध कटान ने जिले में जंगलों का अस्तित्व लगभग खत्म कर दिया है। वन्य जीवों को ठिकाने के लिए कभी बस्ती तो कभी सड़क पर भटकना पड़ रहा है। घरों में गौरैया, कोयल व कबूतर भी कम ही दिखते हैं। पेड़ों के बड़ी तादाद में कटान से जलवायु भी असंतुलित है। तेज धूप व कम बरसात से लोग हलाकान हैं।
वन विभाग हर वर्ष औसतन 5 से 7 लाख पौधे रोपित कराता है। इसमें 25 से 30 फीसदी सूख जाते हैं। जीवित बचे पौधों के पेड़ बनने के मुकाबले कटान ज्यादा है। इसकी बानगी शहर का जीआईसी परिसर है। यहां कुछ सालों से लगातार ट्रीगार्ड बनाकर पौधरोपण कराया गया। अब यहां सिर्फ झाड़ियां हैं। ऐसा ही हाल बाकी जगह भी है।
डीएफओ वीके सिंह का कहना है कि जिले में अवैध कटान पर पूरी तरह से रोक लगाई जाएगी। पिछले साल भी एक सैकड़ा से अधिक केस दर्ज किए गए। मानसून आते ही जिले में 854 हेक्टेयर भूमि पर साढ़े 11 लाख पौधे रोपे जाएंगे। इनमें से 522 हेक्टेयर भूमि पर स्वयं वन विभाग पौधरोपण कराएगा। वन्य जीवों को क्षति पहुंचाने या मारने की घटना होने पर भी कार्रवाई की जाएगी।
राष्ट्रीय पक्षियों को भी वनों के बगैर खतरा
19 जून 2015 को टड़ियावां थाना क्षेत्र के ग्राम सराय स्थित प्राथमिक विद्यालय में मोर का शव पड़ा पाया गया। इसी साल 3 अक्तूबर को सांडी थाना क्षेत्र के रसूलपुर रहमा गांव स्थित नरेश के खेत मेें एक हिरन मरा पड़ा मिला था। ग्रामीणों ने इसकी सूचना थाना पुलिस व वन विभाग को दी। हिरन के मरने की वजह जहर पीना बताई गई है।
हिरनों पर आफत
जिले में पेड़ों का कटना बदस्तूर जारी है। पेड़ों के लगातार कटान से लोनार व कटियारी क्षेत्र में पाए जाने वाले हिरन आफत में हैं। खान पान के लिए हिरनों को गांवों की ओर आना पड़ता है । ऐसे में इनका कुत्ता या शिकारी शिकार कर लेते हैं।