मजलिस पढ़ते हुए मौलाना एजाज मेंहदी। संवाद
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पिहानी। पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब की बेटी फातिमा जहरा की याद में अय्याम-ए-अजा-ए-फातमिया के तहत जारी तीन दिवसीय मजलिसों का रविवार को समापन हो गया। धार्मिक वक्ताओं ने कहा कि महिलाएं फातिमा की जिंदगी और उनकी शिक्षाओं से सीख लें।
मरहूम बब्बे मियां फाटक परिसर में स्थित इमामबाड़ा मोहम्मद कुली में रविवार को मजलिस में लखनऊ के मौलाना कमर अब्बास ने कहा कि फातिमा जहरा ने जिस अंदाज में जीवन यापन किया, उसकी दूसरी मिसाल नहीं मिलती है। दोपहर बाद हुई दूसरी मजलिस में लखनऊ के मौलाना सैयद रहमत अली ने खिताब फरमाया।
उन्होंने कहा कि हमारी इबादतें अहले बैत की मोहब्बत के बिना अधूरी और व्यर्थ हैं। हमें चाहिए कि जिंदगी के हर कदम पर और हर काम में अहले बैत की शिक्षाओं को नमूना बनाएं। इससे पहले शनिवार को पहली मजलिस नासिरिया अरबी कॉलेज जौनपुर के प्रधानाचार्य मौलाना महफूजुल हसन खान, दूसरी मजलिस को लखनऊ मौलाना एजाज मेहंदी और रात में बरपा हुई मजलिस को जामिया हामिदुल मदारिस पिहानी के उस्ताद मौलाना शब्बर हुसैन ने खिताब फरमाया।
मौलाना एजाज मेहंदी ने कहा कि हजरत फातिमा का जीवन औरतों के लिए नमूना है। इन्होंने विभिन्न मौकों पर सब्र और शुक्र की मिसालें पेश कीं। हमें हर हालत में शुक्र और सब्र का दामन थाम कर चलना चाहिए।
इस मौके पर कम्बर अली ने सोजख्वानी की। संचालन जफरुल हसन जैदी ने किया। रविवार को रात में हुई आखरी मजलिस में तकरीर व नौह और मातम के साथ तीन दिवसीय मजलिसों का सिलसिला समापन हो गया।