मनरेगा योजना में महिलाओं की सहभागिता बढ़ाने को शासन
से लगातार दिशा निर्देश आ रहे हैं, पर जनपद में काम करने वाली महिलाओं की
संख्या में बढ़ोतरी नहीं हुई है। एक ओर तो बड़े अफसर महिलाओं की सहभागिता
33 फीसदी करने पर जोर दे रहे हैं।
दूसरी ओर स्थिति यह है कि विकास खंडों
में महिलाओं का प्रतिशत 20 फीसदी भी नहीं हो रहा, जिसमें भी कई विकास
खंडों की स्थिति बद से बदतर है। सरकार ने महिलाओं को प्रोत्साहित करने
को ग्रामीण क्षेत्र में संचालित मनरेगा योजना में महिलाओं को अधिक से अधिक
काम देने के निर्देश दिए हैं।
मनरेगा से महिलाओं को जोड़ने के लिए शासन के
बड़े अफसरों ने काफी जोर भी दिया है। साथ ही सहभागिता बढ़ाने के लिए मनरेगा
कार्र्यों में महिलाओं का कम से कम 33 प्रतिशत सहभागिता करने के निर्देश
दिए हैं। सरकार एक ओर महिलाओं की सहभागिता बढ़ाने पर जोर दे रही, तो यहां महिलाओं का प्रतिशत लगातार कम होता जा रहा है।
जिससे साफ है कि जिले
में महिलाएं घूंघट की ओट े निकल कर मनरेगा में काम ही नहीं करना चाह रही
हैं। यही वजह है कि जनपद में महिलाओं की सहभागिता का प्रतिशत काफी दयनीय
स्थिति में है। भले ही बड़े अफसरों ने महिलाओं की सहभागिता बढ़ाकर 33
प्रतिशत करने के निर्देश दिए हो पर जिले में यह स्थिति सिर्फ 12.5 प्रतिशत
पर ही आकर रुक गई है।
इसी प्रकार विकास खंडों में भी महिलाओं के कार्य करने
का आंकड़ा 20 प्रतिशत तक भी नहीं हुआ है। ज्ञात हो कि जिले में कार्य करने
वाले कुल 26,33,280 जाब कार्डधारकों में से सिर्फ 3,30,249 महिलाएं ही
कार्य कर रही हैं। ऐसे में जनपद में महिलाओं की सहभागिता क्या है आंकड़े
स्वयं ही बयां कर रहे हैं।