हरदोई। ग्राम पंचायत के खातों में शासन से भेजी जाने वाली धनराशि में फिजूलखर्ची रोकने की सजा जिला पंचायत राज अधिकारी को मिल गई। ग्राम प्रधानों के बिना कार्ययोजना बनाए खाते से पैसा निकालने पर पाबंदी लगाने का खामियाजा उन्हें जनपद से कार्यमुक्त होकर भुगतना पड़ा। शासन से स्थानांतरण का आदेश आए बिना डीएम ने उन्हें कार्यमुक्त कर दिया और कार्य प्रभार परियोजना निदेशक को सौंप दिया।
पंचायत चुनाव के बाद ग्राम प्रधानों को पंचायत खाते में जमकर धनराशि दी गई। 14 वें वित्त और 13 वें वित्त से सभी ग्राम प्रधानों के खाते में पांच लाख रुपये से 50 लाख रुपये तक हैं, लेकिन खर्च करने का अधिकार उनके पास नहीं है। जिला पंचायत राज अधिकारी भास्कर दत्त पांडेय ने धनराशि से फिजूलखर्ची रोकने के लिए उस पर रोक लगा दी। लेकिन बाद में रोक हटाने के लिए संबंधित विकास खंड के सहायक विकास अधिकारी पंचायत को अधिकृत कर दिया।
उधर, सहायक विकास अधिकारी पंचायत भी बिना कार्ययोजना के धनराशि निकालने से बचते रहे। शासनादेश भी आ गया जिसमें बजट खर्च करने के लिए पहले कार्य योजना बनाई जाएगी, जिसे एडीओ पंचायत से स्वीकृत कराने के बाद डीपीआरओ और डीएम स्वीकृत करेंगे। हालांकि इसके बाद ग्राम प्रधानों ने कार्ययोजना तो बनवाई लेकिन पक्के निर्माण के स्थान पर सिर्फ मरम्मत के प्रस्ताव अधिक भेजे गए। जिस पर फिर डीपीआरओ ने सख्ती दिखाई।
डीपीआरओ मरम्मत के फर्जी कार्यों पर लगाम लगाना चाहते थे लेकिन उन्हेें खामियाजा भुगतना पड़ गया। जिलाधिकारी रमेश मिश्र ने 22 मार्च की रात को उनको जनपद से कार्यमुक्त करने का आदेश दे दिया, जबकि शासन से उनका स्थानांतरण भी नहीं किया गया। उधर, विभाग का कार्यभार परियोजना निदेशक डीआरडीए प्रदीप यादव को सौंप दिया गया। जिला पंचायत राज अधिकारी भास्कर दत्त पांडेय ने बताया कि वह इस मामले की जानकारी शासन को देंगे।